लातूर, प्रतिनिधि : दिव्यांग भाई-बहनों के हक्का के फंड के लिए आज लातूर शहर में एक अत्यंत भावनात्मक और ध्यान खींचने वाला आंदोलन खड़ा हुआ। शासन के निर्णय के अनुसार महानगरपालिका की ओर से दिव्यांगों के लिए आरक्षित ५ प्रतिशत निधि अभी तक वितरित नहीं किए जाने के विरोध में दिव्यांगों ने अनोखे तरीके से आवाज उठाई।

प्रतीकात्मक अंत्ययात्रा और प्रशासन का विरोध

हाथों में तख्तियां, नारों से गूंजता वातावरण और आंखों में गुस्सा व दर्द लेकर दिव्यांग भाई-बहनों ने शहर से अंत्ययात्रा निकाली। इस अंत्ययात्रा में प्रतीकात्मक शव लेकर वे महापालिका के गेट पर पहुंचे। प्रशासन की निष्क्रियता का विरोध करते हुए उन्होंने यह शव गेट के सामने रखा और जोरदार नारेबाजी की।

अधिकारों की अनदेखी पर छलका दर्द

इस आंदोलन ने न केवल प्रशासन को बल्कि उपस्थित नागरिकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। "हमारे हक जीवित रहते ही 'मृत' हो गए हैं," ऐसी भावनाएं व्यक्त करते हुए आंदोलनकारियों ने अपनी व्यथा रखी। कई दिव्यांगों ने अपनी मुश्किलें बताते हुए भावनात्मक आवेश में आंसू भी बहाए।

भीख नहीं, अधिकार की मांग

दिव्यांग भाई-बहनों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासन द्वारा दिए गए आदेशानुसार निधि समय पर मिलना उनका अधिकार है, दया नहीं। हालांकि, महापालिका की ओर से लगातार हो रही देरी उनके जीवन पर ही असर डाल रही है। आंदोलनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि तत्काल निधि का वितरण किया जाए, अन्यथा आने वाले समय में आंदोलन और अधिक तीव्र किया जाएगा।

प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

यह आंदोलन दिव्यांगों के दर्द और हक के लिए लड़ाई का जीवंत चित्र साबित हुआ है, और अब प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है, इस ओर सभी का ध्यान लगा है।

Pratahkal Bureau

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