लातूर के जलकोट में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ अपनी पत्नी के विनयभंग की शिकायत पर न्याय पाने के लिए लगातार संघर्ष करने वाले एक किसान ने अंततः निराश होकर आत्मघाती कदम उठा लिया। शिकायत पर संज्ञान न लेने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए, किसान ने आत्महत्या करने से पहले एक सुसाइड नोट लिखा और संबंधित पुलिसकर्मी का नाम अपने हाथ पर अंकित किया—यह दृश्य मन को झकझोर देने वाला है।

विनयभंग की शिकायत और पुलिस की निष्क्रियता

मृत किसान की पत्नी के बयान के अनुसार, 21 फरवरी को संदिग्ध गणेश केंद्रे द्वारा उसका विनयभंग किए जाने का आरोप है। इस मामले में उसी दिन जलकोट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई थी। हालांकि, यह गंभीर तथ्य सामने आया है कि पुलिस द्वारा इस मामले में कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई।

धमकियाँ और रिश्वत की मांग

शिकायत वापस लेने के लिए आरोपियों द्वारा पीड़ित परिवार को लगातार धमकियाँ दी जा रही थीं। "शिकायत वापस नहीं ली तो जान से मार देंगे," इस तरह के शब्दों में पीड़ित परिवार पर दबाव डाला जा रहा था। इसके अतिरिक्त, यह भी आरोप लगाया गया है कि शिकायत को एफआईआर में बदलने के बदले में 25 हजार रुपये की मांग की गई थी।

मानसिक तनाव और अंतिम निर्णय

इस पूरे मानसिक तनाव से तंग आकर, 6 अप्रैल की रात लगभग 11.30 बजे उस किसान ने विष प्राशन कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। आत्महत्या से पहले उसके द्वारा लिखी गई चिट्ठी और हाथ पर लिखे नामों से उसकी अंतहीन वेदना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

पुलिस कार्रवाई और मामला दर्ज

इस हृदयविदारक घटना के बाद पुलिस प्रशासन अंततः हरकत में आया है। पुलिस ने दो पुलिस कर्मियों सहित कुल छह लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है।

Pratahkal Bureau

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