लातूर जिले के कारसा गांव में एक वृद्ध आजीबाई के साथ हुए विश्वासघात के मामले में प्रशासन ने सख्त और निर्णायक कार्रवाई करते हुए उन्हें न्याय दिलाया है। माये के स्नेह और भरोसे के आधार पर नातू और पणतू के नाम की गई जमीन को अंततः प्रशासन ने रद्द कर दिया है।

कारसा गांव की एक वृद्ध आजीबाई ने वर्ष 2020 में अपने नातू और पणतू पर विश्वास जताते हुए कुल 3 हेक्टेयर 18 आर जमीन बक्षीसपत्र (Gift Deed) के माध्यम से उनके नाम कर दी थी। इसके बाद संबंधितों ने उक्त जमीन का फेरफार भी अपने नाम पर करवा लिया था। लेकिन जमीन हस्तांतरित होने के बाद आजीबाई के पालन-पोषण और देखभाल की जिम्मेदारी से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया गया। प्रेम, अपनत्व और सहारे की अपेक्षा रखने वाली इस वृद्ध महिला को उपेक्षा और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।

लगातार उपेक्षा से आहत होकर आजीबाई ने लातूर के उपजिल्हाधिकारी रोहिणी नऱ्हे-विरोळे के समक्ष न्याय की गुहार लगाई। प्रशासन ने मामले को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ लेते हुए तत्काल जांच प्रक्रिया शुरू की। दस्तावेजों की जांच, साक्ष्यों का परीक्षण तथा दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उपजिल्हाधिकारी ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया।

निर्णय के अनुसार नातू और पणतू के नाम किया गया 3 हेक्टेयर 18 आर का बक्षीसपत्र रद्द कर दिया गया। साथ ही इस आधार पर किया गया संपूर्ण फेरफार भी निरस्त करने के आदेश जारी किए गए। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधितों द्वारा इस भूमि पर प्राप्त सभी शासकीय लाभों को ब्याज सहित वापस करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा भविष्य में इस संपत्ति पर किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न करने के सख्त निर्देश भी दिए गए हैं।

इस प्रकरण के बाद जिलेभर में चर्चा तेज हो गई है और कई ज्येष्ठ नागरिकों ने इसे राहत देने वाला निर्णय बताया है। बढ़ती उम्र में उपेक्षा की घटनाओं के बीच यह फैसला सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण संदेश देता है।

उपजिल्हाधिकारी रोहिणी नऱ्हे-विरोळे ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा, “आई-वडील या ज्येष्ठ नागरिक प्रेम के कारण अपनी जमीन, घर बच्चों या नातवंडों के नाम कर देते हैं, लेकिन कई बार उनका पालन-पोषण नहीं किया जाता। इसलिए संपत्ति हस्तांतरण के समय देखभाल की शर्त अनिवार्य रूप से शामिल की जानी चाहिए। यदि ज्येष्ठ नागरिकों के साथ अन्याय होता है तो वे निःसंकोच शिकायत करें, प्रशासन संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई करेगा।”

यह घटना केवल एक वृद्ध आजीबाई के न्याय की नहीं, बल्कि ज्येष्ठ नागरिकों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए प्रशासन की सक्रियता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गई है।

Limbraj Panhalkar (Latur)

Limbraj Panhalkar (Latur)

नाम: लिंबराज शिवराम पन्हाळकर

वर्तमान पद: जिला रिपोर्टर (लातूर)

कार्यक्षेत्र: लातूर (महाराष्ट्र)

बीट : क्राइम (अपराध) एवं सभी प्रकार की रिपोर्टिंग

अनुभव: 20 साल

परिचय

लिंबराज शिवराम पन्हाळकर महाराष्ट्र के लातूर जिले के एक वरिष्ठ और अनुभवी समाचार संवाददाता हैं। वह वर्तमान में लातूर जिला रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लिंबराज पन्हाळकर क्षेत्र की सभी प्रकार की प्रशासनिक और स्थानीय खबरों को कवर करते हैं, लेकिन मुख्य रूप से क्राइम (अपराध) से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग में उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

लिंबराज पन्हाळकर को मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और गहरा अनुभव है। दो दशकों से लातूर क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण स्थानीय मुद्दों, कानून-व्यवस्था और क्षेत्रीय गतिविधियों पर उनकी मजबूत पकड़ है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

बी.ए. जर्नलिज्म (B.A. in Journalism): उन्होंने पत्रकारिता विषय में स्नातक (Graduation) की डिग्री हासिल की है।

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