महाराष्ट्र के Latur शहर में महानगरपालिका की कथित घोर लापरवाही और ढीले प्रशासनिक रवैये ने दो मासूम बच्चों की जान ले ली। रविवार शाम शहर के बोधे नगर इलाके में खुले पानी के साठवण गड्ढे में डूबने से दो बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय नागरिकों ने महानगरपालिका प्रशासन के खिलाफ तीव्र नाराजगी जताते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

मृत बच्चों की पहचान दिव्या नवनाथ उबाळे (6) और कार्तिक भरत कांबळे (7) के रूप में हुई है। दोनों बच्चे रविवार शाम अपने घर के पास अन्य बच्चों के साथ खेल रहे थे। इसी दौरान खेलते समय अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वे पास स्थित गहरे पानी के गड्ढे में गिर पड़े। कुछ ही क्षणों में इलाके में चीख-पुकार मच गई।

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय नागरिक मौके पर पहुंचे और जान जोखिम में डालकर दोनों बच्चों को पानी से बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें तुरंत शासकीय अस्पताल ले जाया गया। हालांकि डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों बच्चों को उपचार से पहले ही मृत घोषित कर दिया। अस्पताल में डॉक्टरों की इस घोषणा के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मासूम बच्चों के माता-पिता की चीख-पुकार ने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया।

जानकारी के अनुसार, बोधे नगर क्षेत्र में रामला इंडस्ट्रीज के पीछे स्थित खाली जमीन पर राजू तोडके नामक व्यवसायी पिछले दस वर्षों से पानी सप्लाई का कारोबार कर रहे थे। यहां एक बड़े खुले गड्ढे में बोरवेल का पानी जमा किया जाता था और उसी पानी की छोटे टैंकरों के माध्यम से शहर के विभिन्न हॉस्टल और इलाकों में आपूर्ति की जाती थी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पानी का गड्ढा सड़क किनारे स्थित था और आसपास बच्चों की लगातार आवाजाही रहती थी। इसके बावजूद वहां न तो मजबूत घेराबंदी की गई थी और न ही किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी। यही कारण है कि यह स्थान लंबे समय से दुर्घटना की आशंका का केंद्र बना हुआ था।

नागरिकों ने आरोप लगाया कि इस खतरनाक गड्ढे को लेकर कई बार Latur Municipal Corporation को लिखित और मौखिक शिकायतें दी गई थीं। लोगों ने गड्ढे के चारों ओर सुरक्षा दीवार बनाने, मजबूत फेंसिंग लगाने और तत्काल सुरक्षा उपाय करने की मांग भी की थी। बावजूद इसके प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।

घटना के बाद स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश फैल गया। लोगों ने आरोप लगाया कि यदि महानगरपालिका ने समय रहते कार्रवाई की होती तो दो मासूम बच्चों की जान बचाई जा सकती थी। गुस्साए नागरिकों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।

अब इस मामले में संबंधित अधिकारियों और जमीन मालिक पर सदोष मनुष्यवध का मामला दर्ज करने की मांग तेज हो गई है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने शहर में मौजूद ऐसे सभी खतरनाक और खुले स्थानों का तत्काल सर्वे कर सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की है।

इस दर्दनाक हादसे ने बोधे नगर समेत पूरे लातूर शहर को झकझोर दिया है। दो मासूम बच्चों की मौत के बाद अब नागरिक प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं और पूछ रहे हैं कि आखिर महानगरपालिका की लापरवाही के कारण और कितने निर्दोष लोगों की जान जाएगी।

Pratahkal Bureau

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