लातूर | प्रतिनिधि

आज के वैज्ञानिक युग में भी अनेक नागरिक बीमारी, पारिवारिक संकट, आर्थिक तंगी या मानसिक तनाव से मुक्ति पाने की आशा में विभिन्न धार्मिक स्थलों, दरबारों और बाबाओं की शरण में जाते हैं। हालांकि, श्रद्धा जहां व्यक्ति को मानसिक संबल प्रदान करने वाली शक्ति है, वहीं इसके नाम की आड़ में कुछ ढोंगी प्रवृत्तियां समाज के असहाय लोगों को गुमराह कर रही हैं। इसी कड़ी में, लातूर पुलिस ने एक साहसी और महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए औसा रोड स्थित खोपेगांव शिवारा के सैलानी बाबा दरबार से संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

जांच में सामने आया है कि खोपेगांव निवासी मारोती चंदरराव मोरे दरबार में आने वाले नागरिकों को अंगारा लगाना, विभिन्न यंत्र देना, ताबीज (पेटियां) बांधना और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से बीमारियां दूर होने, संकट मिटने और जीवन की समस्याओं के अंत का दावा करता था। इन दावों के कारण अनेक बीमार, हताश और संकटग्रस्त नागरिक उसके संपर्क में आ रहे थे। जांच से स्पष्ट हुआ कि ऐसी गतिविधियों से समाज में अंधविश्वास को बढ़ावा मिल रहा था।

इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए लातूर ग्रामीण पुलिस थाने के निरीक्षक अरविंद पवार ने स्वयं शिकायत दर्ज कराई। इसके तहत 1 जून 2026 को महाराष्ट्र नरबलि, अन्य अमानवीय, अनिष्ट और अघोरी प्रथाएं तथा जादू-टोना निषेध व उन्मूलन अधिनियम 2013 के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया। अंधविश्वास के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई को प्रभावी बनाने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस कार्रवाई में अंधविश्वास निर्मूलन समिति (अंनिस) के कार्यकर्ताओं का उल्लेखनीय योगदान रहा। समिति के राज्य कार्याध्यक्ष माधव बावगे, प्रा. दशरथ भिसे, सुधीर भोसले, दगडू पडिले, समाधानताई माने, रुकसाना मुल्ला, उत्तरेश्वर बिराजदार और डॉ. हणेश गोमारे ने इस प्रकरण का निरंतर अनुसरण किया। उन्होंने प्रशासन और पुलिस को प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध कराकर इस कार्रवाई में निर्णायक भूमिका निभाई। साथ ही, पुलिस अधिकारी डोंगरे और मोरे ने भी जांच में सराहनीय सहयोग दिया।

यह कार्रवाई मात्र एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज मामला नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर, बीमार और संकट में फंसे लोगों की भावनाओं का फायदा उठाने वाली प्रवृत्तियों के खिलाफ एक ठोस संघर्ष है। यह घटना अंधविश्वास के अंधेरे में डूबे समाज को जागृति का संदेश देने और कानून के प्रति विश्वास सुदृढ़ करने वाली साबित हो रही है। यद्यपि आरोपी की गिरफ्तारी के संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी इस घटना ने पूरे जिले में हलचल मचा दी है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि अंधविश्वास के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के प्रति अब और अधिक सतर्कता बरती जाएगी।

"श्रद्धा आवश्यक है, परंतु अंधविश्वास नहीं!" रोगों का उपचार केवल चिकित्सा विज्ञान और विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास ही उपलब्ध है। किसी भी चमत्कारिक दावे या अघोरी उपायों पर विश्वास करने से पहले नागरिकों का सतर्क रहना अनिवार्य है। श्रद्धा एक व्यक्तिगत विषय है, लेकिन इसके नाम पर होने वाली धोखाधड़ी, आर्थिक लूट और मानसिक शोषण के विरुद्ध समाज का एकजुट होकर आवाज उठाना समय की मांग है। खोपेगांव की इस कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि जन-भावनाओं से खिलवाड़ करने वालों को कानून बख्शेगा नहीं और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को स्थापित करने का संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।

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