लातूर जिले में वर्षभर खेतों में किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मेहनत करने वाले सर्जा-राजा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाला बैलपोळा पर्व गांव-गांव में पारंपरिक तरीके से उत्साह के साथ मनाया गया। किसानों ने अपने बैलों को सजाकर विधिवत पूजा-अर्चना की। हालांकि, इस वर्ष जिले पर सूखे का साया होने के कारण पर्व के उत्साह के बीच किसानों के मन में बारिश, पानी और खड़ी फसलों के भविष्य को लेकर चिंता बनी रही।

बैलपोळा के अवसर पर सुबह से ही गांवों में किसान परिवारों की चहल-पहल शुरू हो गई थी। बैलों को स्नान कराकर साफ किया गया। उनके सींगों पर आकर्षक रंग लगाए गए और शरीर पर रंग-बिरंगी झूल डाली गई। गले में घंटियां और विभिन्न सजावटी वस्तुएं लगाकर बैलों को सजाया गया। इसके बाद घर के आंगन में बैलों की विधिवत पूजा कर आरती की गई।

लातूर जिले के गांवों में बैलों की पारंपरिक शोभायात्रा बैलपोळा का प्रमुख आकर्षण रही। सजे हुए बैलों को लेकर किसान ढोल-ताशों की गूंज के बीच गांव से मंदिर तक पहुंचे। मंदिर की परिक्रमा करने के बाद शोभायात्रा वापस घर लाई गई। घर लौटने के बाद बैलों की दोबारा पूजा-अर्चना कर आरती की गई।

इसके बाद किसान परिवारों ने रिश्तेदारों, मित्रों और गांव के नागरिकों को भोजन के लिए आग्रहपूर्वक आमंत्रित किया। नागरिकों ने भी एक-दूसरे के घर जाकर बैलपोळा की शुभकामनाएं दीं। इससे गांवों में पूरे दिन उत्साह, आपसी स्नेह और ग्रामीण संस्कृति का जीवंत दृश्य देखने को मिला।

हालांकि, इस वर्ष बैलपोळा किसानों के लिए खुशी के साथ चिंता भी लेकर आया। बारिश नहीं होने के कारण जिले के कई हिस्सों में किसान संकट में हैं। बैलों की पीठ पर पानी डालते और उनकी पूजा करते समय किसानों के चेहरों पर खुशी दिखाई दी, लेकिन मन में एक ही सवाल बना रहा—‘बैल की पीठ पर पानी डाला, लेकिन हमारे खेत में पानी कब आएगा?’

बारिश की कमी के कारण कई जगह सोयाबीन सहित खरीफ फसलों की स्थिति खराब हो गई है। आंखों के सामने खड़ी फसलें सूखने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। किसानों को आशंका है कि यदि बारिश ने कुछ और दिन दूरी बनाए रखी तो पशुओं के चारे के साथ-साथ पीने के पानी की समस्या भी गंभीर हो सकती है।

बैलपोळा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि किसान और बैल के बीच के स्नेह, मेहनत और विश्वास के रिश्ते को बनाए रखने वाला दिन है। वर्षभर धूप में खेतों में मेहनत करने वाले बैलों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की यह परंपरा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।

लेकिन इस बार सर्जा-राजा की पूजा करते हुए बळीराजा की नजर आकाश पर टिकी रही। बैल की पीठ पर पानी का अभिषेक हुआ, लेकिन खेत की प्यासी जमीन और सूखती फसलों के लिए बारिश का इंतजार कायम रहा। लातूर जिले में बैलपोळा पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया, लेकिन सूखे के साये में किसानों के चेहरों पर खुशी से अधिक चिंता की लकीरें स्पष्ट दिखाई दीं।

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Limbraj Panhalkar (Latur)

Limbraj Panhalkar (Latur)

नाम: लिंबराज शिवराम पन्हाळकर

वर्तमान पद: जिला रिपोर्टर (लातूर)

कार्यक्षेत्र: लातूर (महाराष्ट्र)

बीट : क्राइम (अपराध) एवं सभी प्रकार की रिपोर्टिंग

अनुभव: 20 साल

परिचय

लिंबराज शिवराम पन्हाळकर महाराष्ट्र के लातूर जिले के एक वरिष्ठ और अनुभवी समाचार संवाददाता हैं। वह वर्तमान में लातूर जिला रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लिंबराज पन्हाळकर क्षेत्र की सभी प्रकार की प्रशासनिक और स्थानीय खबरों को कवर करते हैं, लेकिन मुख्य रूप से क्राइम (अपराध) से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग में उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

लिंबराज पन्हाळकर को मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और गहरा अनुभव है। दो दशकों से लातूर क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण स्थानीय मुद्दों, कानून-व्यवस्था और क्षेत्रीय गतिविधियों पर उनकी मजबूत पकड़ है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

बी.ए. जर्नलिज्म (B.A. in Journalism): उन्होंने पत्रकारिता विषय में स्नातक (Graduation) की डिग्री हासिल की है।

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