लातूर: महाराष्ट्र में लगातार उजागर हो रहे ढोंगी बाबाओं और उनके फर्जी कारनामों ने समाज में भय और असुरक्षा का वातावरण निर्मित कर दिया है। इसी कड़ी में लातूर जिले में भी भोंदूगिरी के विरुद्ध अब एक निर्णायक और आक्रामक संघर्ष छेड़ दिया गया है। आध्यात्मिक शक्ति, चमत्कार, भविष्य बताने और अध्यात्म की आड़ में निर्दोष नागरिकों की आर्थिक धोखाधड़ी, मानसिक उत्पीड़न और महिलाओं के शोषण जैसी गंभीर घटनाएं निरंतर सामने आ रही हैं। इन विकृतियों को रोकने के लिए महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (अंनिस), लातूर शाखा ने अब प्रशासन के विरुद्ध कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।

समिति के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय के माध्यम से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक आधिकारिक ज्ञापन सौंपकर 'जादू-टोना विरोधी कानून' को प्रभावी ढंग से लागू करने की पुरजोर मांग की है। इसके साथ ही, सार्वजनिक जीवन में शुचिता बनाए रखने के लिए राजनीतिक नेताओं हेतु भी एक विशिष्ट आचार संहिता लागू करने का आग्रह किया गया है। अंनिस ने इस बात पर गहरा असंतोष व्यक्त किया कि लातूर जिले के सक्रिय ५२ ढोंगी बाबाओं और बुवाओं की सूची पुलिस प्रशासन को अब तक तीन बार सौंपी जा चुकी है, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई अब भी प्रतीक्षित है। संगठन ने मांग की है कि इन ५२ संदिग्धों पर तत्काल कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

सौंपे गए ज्ञापन में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि जादू-टोना निवारण अधिनियम २०१३ का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए और जिला स्तर पर इस संदर्भ में एक विशेष समिति की तत्काल बैठक बुलाई जाए। इसके अतिरिक्त, जिले में नए सिरे से पनप रहे ढोंगी बाबाओं की खोज करने और बड़े पैमाने पर जन-जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया है। पुलिस महानिदेशक के निर्देशों का हवाला देते हुए अंनिस ने मांग रखी है कि प्रत्येक पुलिस स्टेशन में एक स्वतंत्र 'अंधश्रद्धा निर्मूलन कक्ष' स्थापित किया जाए, जिसका कामकाज सक्रिय और परिणामोन्मुखी हो। साथ ही, संबंधित पुलिस अधिकारियों को इस विशेष कानून के बारीकियों का प्रशिक्षण देना भी अनिवार्य बताया गया है।

भारतीय संविधान द्वारा प्रतिपादित वैज्ञानिक दृष्टिकोण के मूल्यों के प्रचार-प्रसार हेतु स्कूल, कॉलेज और सामाजिक स्तर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान किया गया है ताकि अंधविश्वास की जड़ें कमजोर की जा सकें। इस अवसर पर अंनिस के राज्य अध्यक्ष माधव बावगे, प्रधान सचिव रुकसाना मुल्ला, महासचिव उत्तरेश्वर बिराजदार सहित जिला एवं शहर के विभिन्न पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित थे। प्रशासन को दिया गया संदेश पूरी तरह स्पष्ट है कि समाज को मानसिक और आर्थिक दासता से बचाने के लिए अब ठोस और त्वरित कार्रवाई का समय आ गया है।

Limbraj Panhalkar (Latur)

Limbraj Panhalkar (Latur)

नाम: लिंबराज शिवराम पन्हाळकर

वर्तमान पद: जिला रिपोर्टर (लातूर)

कार्यक्षेत्र: लातूर (महाराष्ट्र)

बीट : क्राइम (अपराध) एवं सभी प्रकार की रिपोर्टिंग

अनुभव: 20 साल

परिचय

लिंबराज शिवराम पन्हाळकर महाराष्ट्र के लातूर जिले के एक वरिष्ठ और अनुभवी समाचार संवाददाता हैं। वह वर्तमान में लातूर जिला रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लिंबराज पन्हाळकर क्षेत्र की सभी प्रकार की प्रशासनिक और स्थानीय खबरों को कवर करते हैं, लेकिन मुख्य रूप से क्राइम (अपराध) से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग में उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

लिंबराज पन्हाळकर को मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और गहरा अनुभव है। दो दशकों से लातूर क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण स्थानीय मुद्दों, कानून-व्यवस्था और क्षेत्रीय गतिविधियों पर उनकी मजबूत पकड़ है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

बी.ए. जर्नलिज्म (B.A. in Journalism): उन्होंने पत्रकारिता विषय में स्नातक (Graduation) की डिग्री हासिल की है।

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