कोरपना तहसील कार्यालय के सामने अपने हक की कृषि भूमि के लिए आमरण अनशन कर रहे ८० वर्षीय किसानों की मांग पर आखिरकार चार दिन बाद प्रशासन ने संज्ञान लिया। भूमि अभिलेख कार्यालय ने मौके की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की और विवादित स्थान का विवाद निपटाए जाने की जानकारी दी। साथ ही संबंधित किसानों की भूमि का प्रत्यक्ष सीमांकन कराए जाने का लिखित पत्र भूमि अभिलेख कार्यालय की ओर से अनशनकारियों को सौंपा गया। इसके बाद तहसीलदार, भूमि अभिलेख विभाग के अधिकारी और पुलिस निरीक्षक की मौजूदगी में नींबू शरबत पिलाकर अनशन समाप्त कराया गया।

मौजा कोडशी खुर्द निवासी ८० वर्षीय किसान नानाजी तुकाराम बोरडे और बापूराव तुकाराम बोरडे अपने हक की कृषि भूमि को लेकर कोरपना तहसील कार्यालय के सामने आमरण अनशन पर बैठे थे। अनशनकारियों का आरोप था कि सरकारी माप का प्रमाण उपलब्ध होने के बावजूद प्रशासन की ओर से उचित कार्रवाई नहीं की जा रही थी।

क्या है पूरा मामला

बताया गया कि नानाजी बोरडे की मौजा कोडशी खुर्द स्थित सर्वे नंबर ५८ में कृषि भूमि है। इस भूमि की आधिकारिक सरकारी माप रजिस्टर क्रमांक ११७९ के तहत २३ मार्च २०२३ को की गई थी। भूमि अभिलेख कार्यालय से प्राप्त ‘क प्रत’ माप नक्शे के आधार पर खेत की सीमा को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था। बोरडे ने आरोप लगाया था कि पड़ोसी किसानों की ओर से उनकी जमीन में अतिक्रमण किया गया है।

इस मामले में अवैध बाड़ हटाकर सरकारी माप के अनुसार सीमा निर्धारित करने की मांग की गई थी। अनशनकारियों के अनुसार, इसके लिए १० जुलाई २०२३ को तहसील कार्यालय में आवेदन भी दिया गया था।

प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

मामले में समय पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए बोरडे ने अंततः तहसील कार्यालय के सामने आमरण अनशन शुरू कर दिया। बिगर सातबारा किसान संगठन के भाई जगदीश कुमार इंगले के नेतृत्व में आंदोलन किया गया। संबंधित अधिकारियों, तलाठी और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों की जांच कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी की गई।

अनशन शुरू होने के बाद प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया और भूमि अभिलेख विभाग के माध्यम से मौके पर प्रत्यक्ष जांच कराई। जांच के बाद रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।

सीमांकन का मिला लिखित आश्वासन

मौके की जांच के बाद प्रशासन की ओर से बताया गया कि विवादित स्थान से संबंधित मामला निपटा दिया गया है। साथ ही संबंधित किसानों की कृषि भूमि का सीमांकन कराए जाने का लिखित पत्र भूमि अभिलेख कार्यालय ने अनशनकारियों को सौंपा। प्रशासन से लिखित आश्वासन मिलने के बाद चार दिनों से जारी आमरण अनशन समाप्त कर दिया गया।

इस दौरान भूमि अभिलेख कार्यालय के अधिकारी, कोरपना तहसीलदार और पुलिस निरीक्षक मौजूद रहे। अधिकारियों ने अनशनकारियों को नींबू शरबत पिलाकर अनशन समाप्त कराया।

चार दिनों के आंदोलन के बाद ८० वर्षीय किसानों की मांग पर प्रशासन की ओर से संज्ञान लिए जाने से उन्हें राहत मिली है। हालांकि, प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुसार प्रत्यक्ष सीमांकन की कार्रवाई तत्काल पूरी कर किसानों को न्याय दिलाने की मांग की गई है।

Manoj Gore (Chandrapur)

Manoj Gore (Chandrapur)

नाम: मनोज रामकृष्ण गोरे

वर्तमान पद: रिपोर्टर (प्रातःकाल)

कार्यक्षेत्र: चंद्रपुर जिला (महाराष्ट्र)

बीट (मुख्य विषय): प्रशासन

परिचय

मनोज रामकृष्ण गोरे महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र के रिपोर्टर हैं। वह मुख्य रूप से चंद्रपुर जिले के प्रशासनिक विभागों की कार्यप्रणाली, सरकारी योजनाओं, जनसुनवाई, विकास कार्यों और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव 

मनोज रामकृष्ण गोरे को मीडिया क्षेत्र में ग्राउंड रिपोर्टिंग और समाचार संकलन का 5 वर्ष का अनुभव है। वह पिछले पांच सालों से चंद्रपुर जिले के स्थानीय और प्रशासनिक मुद्दों को नियमित रूप से रिपोर्ट कर रहे हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

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