शक्तिपीठ महामार्ग के विरोध में बोरवडे में सर्वपक्षीय बैठक, गांव बंदी की चेतावनी से बढ़ा तनाव
कोल्हापुर के बोरवडे में शक्तिपीठ महामार्ग के खिलाफ हुई सर्वपक्षीय बैठक में ग्रामीणों ने बड़ा फैसला लिया। 600 एकड़ भूमि अधिग्रहण और 80 कुओं पर असर के बीच गांव बंदी की चेतावनी ने प्रशासन और नेताओं की चिंता बढ़ा दी है।

कोल्हापुर के कागल तालुका स्थित बोरवडे गांव के ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर में मंगलवार को शक्तिपीठ महामार्ग परियोजना के विरोध में आयोजित सर्वपक्षीय बैठक में रणनीति बनाते स्थानीय ग्रामीण और प्रतिनिधि।
कोल्हापुर ज़िले के कागल तालुका स्थित बोरवडे गांव में प्रस्तावित शक्तिपीठ महामार्ग परियोजना के विरोध में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण सर्वपक्षीय बैठक आयोजित की गई। यह बैठक ग्रामदैवत ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर में बोरवडे, फराकटेवाड़ी और उंदरवाड़ी के ग्रामस्थों की उपस्थिति में संपन्न हुई, जिसमें परियोजना के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सामूहिक विरोध का निर्णय लिया गया।
बैठक में उपस्थित ग्रामस्थों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में शक्तिपीठ महामार्ग को गांव क्षेत्र से गुजरने नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि तालुका स्तर के सभी प्रमुख नेताओं से मिलकर परियोजना को रद्द करने की मांग रखी जाएगी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जनप्रतिनिधि किसानों के पक्ष में खड़े नहीं होते हैं, तो संबंधित नेताओं को गांव में प्रवेश से रोकने यानी गांव बंदी जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
Kolhapur ज़िले के Kagal तालुका अंतर्गत इस बैठक में बिद्री साखर कारखाने के उपाध्यक्ष मनोज फराकटे ने कहा कि प्रस्तावित महामार्ग से बोरवडे क्षेत्र की उपजाऊ कृषि भूमि, आवासीय घरों और 80 से अधिक कुओं पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के लिए लगभग 600 एकड़ भूमि अधिग्रहित किए जाने की योजना है, जिससे ग्रामीणों में गहरी नाराजगी व्याप्त है। उन्होंने यह भी कहा कि जिले के सभी जनप्रतिनिधियों और नेताओं से मिलकर ज्ञापन सौंपा जाएगा और परियोजना को रद्द करने की मांग की जाएगी।
पंचायत समिति सदस्य बालाजी फराकटे ने कहा कि वे राजनीतिक गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद किसानों के हितों को सर्वोपरि मानते हुए इस मुद्दे पर ग्रामीणों के साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने दोहराया कि किसी भी स्थिति में शक्तिपीठ महामार्ग को आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा।
सामाजिक कार्यकर्ता संभाजी फराकटे और डॉ. रमेश चौगले ने बैठक में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि मोजणी या सर्वेक्षण के लिए कोई अधिकारी या कर्मचारी गांव में प्रवेश करता है, तो उसे बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। अन्य ग्रामीण प्रतिनिधियों ने भी इस विरोध को व्यापक रूप देने की बात कही।
बैठक में उपसरपंच दत्तात्रय पाटील, सुनील मगदूम, तानाजी साठे, युवराज पोवार, सचिन साठे, दत्तात्रय चांदेकर, बाळासो सूर्यवंशी, रणजीत सूर्यवंशी सहित अनेक ग्रामस्थ और विभिन्न गुटों के कार्यकर्ता उपस्थित रहे। अंत में पी.बी. चव्हाण ने आभार प्रदर्शन किया।
यह बैठक केवल एक स्थानीय विरोध नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में प्रस्तावित बुनियादी परियोजनाओं को लेकर ग्रामीण असंतोष और संगठित प्रतिरोध का संकेत बनकर सामने आई है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
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