कोल्हापुर: शाहू स्मारक भवन की भाडेवाढी के खिलाफ कलाकरों और सामाजिक संगठनों का आंदोलन
कोल्हापुर के ऐतिहासिक शाहू स्मारक भवन का बढ़ा हुआ किराया बना कलाकारों के लिए संकट। सांस्कृतिक केंद्रों को बचाने के लिए सड़कों पर उतरे कलाप्रेमी, जिला कलेक्टर से लगाई गुहार। क्या कोल्हापुर की कला संस्कृति को मिलेगी राहत?

कोल्हापुर के शाहू स्मारक भवन के बढ़े हुए किराए के विरोध में कला और सामाजिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर अपनी मांगों का निवेदन सौंपा।
कोल्हापुर के सांस्कृतिक और वैचारिक स्पंदन का केंद्र माने जाने वाले ऐतिहासिक शाहू स्मारक भवन का नूतनीकरण कला जगत के लिए उत्साह का विषय था, लेकिन अब यह चर्चा का केंद्र एक गंभीर चिंता के कारण बना हुआ है। नूतनीकरण के उपरांत सभागृह के किराए में की गई भारी वृद्धि ने कोल्हापुर के कलाकारों, सांस्कृतिक संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को सकते में डाल दिया है। इस आर्थिक बोझ के विरोध में कला और सामाजिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर जिला कलेक्टर से भेंट की और अपनी व्यथा के समाधान हेतु औपचारिक निवेदन सौंपा है।
प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि शाहू स्मारक भवन केवल एक इमारत नहीं, बल्कि वर्षों से कोल्हापुर की सांस्कृतिक विरासत का वाहक रहा है। यह स्थल स्थानीय कलाकारों और सामाजिक संगठनों के लिए सदैव एक किफायती और सुलभ मंच के रूप में कार्य करता रहा है। हालांकि, हालिया वृद्धि के कारण किराया अब कई संस्थाओं और कलाकारों की आर्थिक क्षमता से बाहर हो गया है। निवेदनों में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि यदि इस बढ़े हुए किराए में संशोधन नहीं किया गया, तो भविष्य में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों की संख्या में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे कोल्हापुर की जीवंत सांस्कृतिक परंपरा को अपूरणीय क्षति होगी।
इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए कोल्हापुर के जिलाधिकारी ने शिष्टमंडल की बातों को धैर्यपूर्वक और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ सुना। कलाकारों की पीड़ा और उनके तर्कों को समझते हुए, उन्होंने आश्वस्त किया कि किराए में की गई वृद्धि पर पुनर्विचार किया जाएगा। उन्होंने विश्वास दिलाया कि इस समस्या का एक व्यावहारिक और कला-अनुकूल समाधान खोजने के लिए प्रशासन तत्पर है और उचित निर्णय लिया जाएगा। इस प्रतिनिधि मंडल में जावेद नायकवडी, प्रसाद जमदग्नी, जबीन शेख, संदीप व्हटकर, सचिन भोसले, प्रसाद कुंभार, संजय नलवडे, अमेय व्हटकर, मंगेश डाकवे, कुतुब मुजावर, झाकीर स्वार, रमेश घाटगे और सचिन पवार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति सम्मिलित थे।
शाहू स्मारक भवन की यह घटना स्पष्ट करती है कि विकास की प्रक्रिया में सांस्कृतिक केंद्रों की सुलभता बनाए रखना कितना अनिवार्य है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि कोल्हापुर की कला यात्रा पूर्व की भांति निर्बाध रूप से जारी रह पाएगी या नहीं।

NIyaj Jamadar, Kolhapur
क्राइम रिपोर्टर एवं संवाददाता
नियाज निजाम जमादार एक अनुभवी और समर्पित पत्रकार हैं, जिन्होंने पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहकर विशेष रूप से अपराध, कानून-व्यवस्था और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग में अपनी पहचान बनाई है। उनकी निष्पक्ष, तथ्यपरक और जमीनी पत्रकारिता ने उन्हें क्षेत्र में एक विश्वसनीय क्राइम रिपोर्टर के रूप में स्थापित किया है।
पत्रकारिता के अपने लंबे सफर में उन्होंने साप्ताहिक प्रगत धारा, दर्शन पुलिस टाइम, सतर्क पुलिस टाइम तथा दैनिक बंधुता जैसे प्रतिष्ठित समाचार माध्यमों के साथ कार्य किया है। इन संस्थानों में कार्य करते हुए उन्होंने अपराध जगत, पुलिस प्रशासन, सामाजिक घटनाओं और नागरिक समस्याओं से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण खबरों को प्रमुखता से पाठकों तक पहुंचाया।
वर्तमान में वे प्रातःकाल में संवाददाता (क्राइम बीट) के रूप में कार्यरत हैं। उनका कार्यक्षेत्र कोल्हापुर शहर है, जहां वे अपराध, पुलिस कार्रवाई, कानून-व्यवस्था, सामाजिक घटनाओं और जनहित से जुड़े विषयों पर सटीक एवं प्रभावशाली रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
नियाज जमादार का मानना है कि पत्रकारिता केवल समाचार देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और प्रशासन के बीच एक मजबूत सेतु है। सत्य, निष्पक्षता और जनहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ही उनकी पत्रकारिता की सबसे बड़ी पहचान है। प्रातःकाल के साथ जुड़कर वे अपने अनुभव और पेशेवर दृष्टिकोण के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय एवं प्रभावशाली समाचार पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।
