कोल्हापुर की मूर्तिकला विरासत को कुंभार समाज ने संजोया, राजे समरजीतसिंह घाटगे ने दिया संरक्षण का भरोसा
कोल्हापुर के बापट कैंप में मूर्तिकारों से मिले राजे समरजीतसिंह घाटगे ने कुंभार समाज की समस्याएं सुनीं और परंपरागत मूर्तिकला को संरक्षण का भरोसा दिया।

तस्वीर में राजे समरजीतसिंह घाटगे और अन्य लोग कोल्हापुर के बापट कैंप क्षेत्र स्थित एक मूर्तिकला कार्यशाला में गणेश प्रतिमा और मूर्ति निर्माण प्रक्रिया का निरीक्षण करते नजर आ रहे हैं।
कोल्हापुर की सांस्कृतिक पहचान और मूर्तिकला की गौरवशाली परंपरा को लेकर शाहू उद्योग समूह के अध्यक्ष राजे समरजीतसिंह घाटगे ने कहा कि देशभर में कलाकारों की भूमि के रूप में प्रसिद्ध कोल्हापुर को छत्रपति शाहू महाराज के राजाश्रय से नई ऊर्जा मिली और इस गौरवशाली विरासत को कुंभार समाज ने अपनी उत्कृष्ट मूर्तिकला के माध्यम से आज तक सुरक्षित रखा है।
राजे समरजीतसिंह घाटगे ने बापट कैंप क्षेत्र स्थित विभिन्न मूर्तिकारों की कार्यशालाओं का दौरा कर मूर्ति निर्माण की प्रक्रिया का निरीक्षण किया। इसके बाद कोल्हापुर शहर कुंभार माल उत्पादक सोसायटी में आयोजित संवाद कार्यक्रम में उन्होंने मूर्ति निर्माण, पारंपरिक मिट्टी कला और कलाकारों की कार्यकुशलता की जानकारी प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त की।
मूर्तिकारों से संवाद के दौरान उन्होंने व्यवसाय के समक्ष मौजूद विभिन्न समस्याओं, कच्चे माल की उपलब्धता, बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, आर्थिक चुनौतियों तथा शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि कुंभार समाज ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी संस्कृति की इस अमूल्य धरोहर को संरक्षित रखा है और कोल्हापुर में निर्मित गणेश प्रतिमाओं की देश-विदेश में व्यापक मांग है।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक मूर्तिकला व्यवसाय को अधिक सशक्त बनाने के लिए आधुनिक तकनीक, व्यापक बाजार और शासन की विभिन्न योजनाओं का सहयोग आवश्यक है। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि कुंभार समाज की न्यायसंगत मांगों को पूरा कराने के लिए वह पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रयास करेंगे।
इस अवसर पर राज्य शासन के मानपत्र से सम्मानित वरिष्ठ चित्रकार गणपत माजगांवकर का राजे समरजीतसिंह घाटगे के हाथों सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में नगरसेवक प्रमोद देसाई, स्वरूप कदम, वैभव माने, विजेंद्र माने, राजनंदिनी महाडिक, वंदना मोहिते, सोसायटी की अध्यक्षा सुरेखा माजगांवकर, संचालक अभिजीत कुंभार, मारुतराव कातवरे, प्रकाश तारळेकर, प्रकाश सरवडेकर, किरण माजगांवकर, प्रमोद कुंभार, सुदर्शन माजगांवकर सहित कुंभार समाज के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में मूर्तिकार उपस्थित रहे।
इस दौरान बापट कैंप क्षेत्र के वर्ग-दो के प्लॉटों को वर्ग-एक में परिवर्तित करने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। बताया गया कि राज्य शासन ने लगभग 59 वर्ष पूर्व बापट कैंप क्षेत्र की साढ़े उनतीस एकड़ भूमि कुंभार समाज को व्यवसाय और निवास के लिए उपलब्ध कराई थी। हालांकि, प्लॉट वर्ग-दो में होने के कारण ऋण, हस्तांतरण और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। नगरसेवक विजेंद्र माने की पहल पर इस संबंध में प्रस्ताव शासन के पास लंबित है। इस पर राजे समरजीतसिंह घाटगे ने आश्वासन दिया कि वह राजस्व मंत्री तथा आवश्यकता पड़ने पर मुख्यमंत्री से भी प्रभावी स्तर पर पैरवी कर इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे। कार्यक्रम ने कोल्हापुर की पारंपरिक मूर्तिकला, कुंभार समाज की समस्याओं और उनके समाधान की दिशा में आवश्यक सहयोग की जरूरत को एक बार फिर प्रमुखता से सामने रखा।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
पत्रकारिता का दृष्टिकोण:
सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।
ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।
