कोल्हापुर। जय शिवराय एज्युकेशन सोसायटी के सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय, मुरगूड के राष्ट्रीय छात्र सेना (NCC) विभाग की ओर से महाविद्यालय परिसर में उत्साहपूर्ण वातावरण में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शिवाजी होडगे ने वृक्षारोपण कर किया।

इस अवसर पर NCC विभाग के ANO लेफ्टनंट विनोदकुमार प्रधान सहित प्राध्यापक, शिक्षकेतर कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में NCC कैडेट्स उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत NCC कैडेट्स द्वारा पर्यावरण संरक्षण की शपथ लेकर की गई। इसके बाद महाविद्यालय परिसर में छायादार, फलदार तथा पर्यावरण अनुकूल विभिन्न प्रकार के पौधों का रोपण किया गया।

आयोजकों ने बताया कि लगाए गए प्रत्येक पौधे के संरक्षण और देखभाल की जिम्मेदारी NCC कैडेट्स को सौंपी गई है। इसके तहत पौधों को नियमित रूप से पानी, खाद तथा आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि उनका समुचित विकास सुनिश्चित किया जा सके।

इस दौरान ANO ले. विनोदकुमार प्रधान ने अपने मार्गदर्शन में कहा, "NCC कैडेट्स केवल अनुशासित विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन के सक्रिय दूत भी हैं। एक पौधा लगाना भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राणवायु की स्थायी पूंजी है। आज लगाया गया प्रत्येक वृक्ष आने वाले समय के स्वस्थ भारत की मजबूत नींव बनेगा।" उन्होंने प्रत्येक कैडेट से कम से कम एक पौधा गोद लेकर उसके संरक्षण का दायित्व निभाने का आह्वान किया।

प्राचार्य डॉ. शिवाजी होडगे ने अपने संबोधन में कहा, "वृक्षारोपण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पर्यावरणीय जिम्मेदारी का संस्कार है। बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और पर्यावरणीय असंतुलन का प्रभावी समाधान वृक्षारोपण तथा उससे भी अधिक महत्वपूर्ण वृक्षों का संरक्षण है। महाविद्यालय परिसर को हरित बनाए रखने के लिए NCC विभाग का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है।"

कार्यक्रम में भूगोल विभागाध्यक्ष प्रा. दादासाहेब सरदेसाई, डॉ. दिपाली सामंत, डॉ. गुरुनाथ सामंत, डॉ. सोनाली कुंभार, आशीष घाटगे, राकेश माने, सौ. स्वाती हुकेरीकर, सौ. वैशाली कौलवकर, कु. वेदिका मगदूम, आर. वी. गाडेकर तथा शिक्षकेतर कर्मचारी रोहित परीट की प्रमुख उपस्थिति रही।

कार्यक्रम के समापन पर सभी ने लगाए गए पौधों के नियमित संरक्षण का संकल्प लिया। NCC कैडेट्स की उत्साहपूर्ण भागीदारी से कार्यक्रम को विशेष ऊर्जा मिली और महाविद्यालय परिसर से पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी संदेश समाज तक पहुंचाया गया।

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