कोल्हापुर के मुरगूड में पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक प्रेरक उदाहरण देखने को मिला, जहाँ शिवभक्त युवाओं ने अनवरत श्रमदान कर सरपिराजीराव तलाव और उससे जुड़े प्राकृतिक जलमार्ग को एक नई पहचान दी है। मानसून के आगमन से पूर्व, इस महत्वपूर्ण जलस्रोत को सुरक्षित और स्वच्छ रखने के उद्देश्य से युवाओं ने अलसुबह ही सफाई अभियान का बीड़ा उठाया। पिछले पांच वर्षों से निरंतर जारी इस अनुकरणीय उपक्रम के तहत, सुबह साढ़े पांच बजे से आठ बजे तक चले तीन घंटे के सघन स्वच्छता अभियान में युवाओं ने न केवल तलाव के तटों को, बल्कि तलाव तक जल पहुँचाने वाले नैसर्गिक ओढे को भी कचरा मुक्त किया।

सफाई अभियान की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि युवाओं की टीम ने परिसर से तीन ट्रॉली कचरा बाहर निकाला। इस कचरे में आठ सौ से अधिक शराब की खाली बोतलें, दो सौ से ज्यादा शीतल पेय की बोतलें, और भारी मात्रा में प्लास्टिक व अन्य हानिकारक अपशिष्ट शामिल थे। मद्यपी तत्वों द्वारा फेंकी गई कांच की नुकीली टूटियों और अन्य घातक वस्तुओं की तनिक भी परवाह न करते हुए, इन युवाओं ने अत्यंत सतर्कता के साथ पूरे क्षेत्र को स्वच्छ किया। चूँकि यह ओढा तलाव की जीवनरेखा माना जाता है, इसलिए इसकी विशेष सफाई पर युवाओं ने विशेष बल दिया।

सामाजिक कार्यकर्ता सर्जेराव भाट, ओंकार पोतदार, तानाजी भराडे सहित अनेक युवाओं और उनकी अकादमी के विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने इस अभियान को सफल बनाया। यह टीम केवल तलाव तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मुरगूड शहर की नदियों, स्मशानभूमि और वाघापूर, घोडेकर व कुरणी जैसी यात्राओं के बाद उत्पन्न होने वाले कचरे को साफ करने का सामाजिक उत्तरदायित्व भी निरंतर निभा रही है। पर्यावरण संवर्धन के प्रति इन शिवभक्तों का समर्पण क्षेत्र के निवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है और हर ओर उनके इस निस्वार्थ कार्य की सराहना हो रही है।

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