कोगील बुद्रुक में महाराष्ट्र कृषि दिवस पर किसान संवाद कार्यक्रम, मृदा परीक्षण और खरीफ प्रबंधन पर मिला वैज्ञानिक मार्गदर्शन
कोल्हापुर के कोगील बुद्रुक में महाराष्ट्र कृषि दिवस पर आयोजित किसान संवाद कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने मृदा परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और खरीफ फसल प्रबंधन पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया।

तस्वीर में कोगील बुद्रुक गांव में आयोजित कृषि मार्गदर्शन कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद कृषि विशेषज्ञ और सामने बैठे छात्र व स्थानीय किसान दिखाई दे रहे हैं।
कोल्हापुर के कोगील बुद्रुक गांव में महाराष्ट्र कृषि दिवस के अवसर पर महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, राहुरी के अंतर्गत संचालित राजर्षि छत्रपति शाहू महाराज शासकीय कृषि महाविद्यालय, कोल्हापुर द्वारा ग्रामीण कृषि जागरूकता एवं कृषि औद्योगिक कार्यानुभव कार्यक्रम (RAWE) 2026-27 (खरीफ) के तहत किसान संवाद एवं कृषि मार्गदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी किसानों तक पहुंचाना, उत्पादन लागत कम कर आय में वृद्धि करना तथा टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. शैलेंद्र कांबळे ने की। उन्होंने किसानों को मृदा परीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भूमि के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए जैविक और रासायनिक उर्वरकों का संतुलित समन्वय आवश्यक है। साथ ही किसानों से अंधाधुंध उर्वरक उपयोग से बचते हुए वैज्ञानिक पद्धति से खेती अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मार्गदर्शक के रूप में उपस्थित सहायक प्राध्यापक (मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायनशास्त्र) डॉ. वी. एन. नाळे ने मृदा परीक्षण के लाभ, भूमि की उर्वरता बढ़ाने के उपाय, खरीफ मौसम की फसलों की योजना, पोषण प्रबंधन तथा बदलती जलवायु की परिस्थितियों में आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने पर विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान किसानों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर भी उन्होंने दिए।
कार्यक्रम में डॉ. वी. डी. गेडाम, डॉ. बी. टी. कोलगणे, डॉ. एम. आर. खराडे, अश्विनी कसुटे, मधुली गुडाळे, कोगील बुद्रुक के प्रशासक आर. के. खोत, भूपाल पाटील तथा भैरव ताकमारे की प्रमुख उपस्थिति रही।
इस अवसर पर कृषि कन्याओं ऋषिका माने, संध्या पेटकर, प्रांजल मांजरे, पूजा नाळे, प्राजक्ता पाटील और गौरी खाटपे ने कार्यक्रम के आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई। क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसान कार्यक्रम में शामिल हुए और कृषि विशेषज्ञों से वैज्ञानिक खेती, मृदा परीक्षण के महत्व तथा खरीफ मौसम की प्रभावी योजना संबंधी उपयोगी जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम के समापन पर किसानों ने वैज्ञानिक खेती, मृदा परीक्षण की उपयोगिता और खरीफ फसलों के बेहतर नियोजन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिलने पर संतोष व्यक्त किया।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
पत्रकारिता का दृष्टिकोण:
सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।
ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।
