पावस की राहत के बीच खेतों में कोलपनी तेज, छुट्टी पर बच्चों ने भी माता-पिता संग संभाली खेती की जिम्मेदारी
कोल्हापुर में लगातार बारिश के बाद मौसम खुलते ही किसानों ने खेतों में कोलपनी का कार्य तेज कर दिया। छुट्टी का दिन होने से बच्चे भी माता-पिता के साथ खेती में हाथ बंटाते नजर आए। इस दौरान खेती, श्रम संस्कार और नई पीढ़ी को मिट्टी से जोड़ने का प्रेरक संदेश भी सामने आया।

कोल्हापुर में एक बैठक के दौरान उपस्थित लोग अपने हाथों में पत्रक लिए खड़े हैं, जिसके पीछे की दीवार पर एक चित्र लगा हुआ है।
कोल्हापुर : विजय मोरबाळे
लगातार हो रही बारिश के बाद मौसम खुलने से किसानों को बड़ी राहत मिली है। मिली हुई इस उघड़ी का पूरा लाभ उठाते हुए किसान खेतों में कोलपनी के कार्य में जुट गए हैं। वहीं, छुट्टी का दिन होने के कारण छोटे-छोटे बच्चे भी अपने माता-पिता के साथ खेतों में उतरकर खेती के कार्य में उत्साहपूर्वक हाथ बंटाते दिखाई दे रहे हैं।
लगातार वर्षा के बाद मिले अनुकूल मौसम से खेतों में कोलपनी के कार्यों ने गति पकड़ ली है। खरपतवार नियंत्रण, फसलों की बेहतर बढ़वार और उत्पादन वृद्धि के लिए समय पर कोलपनी होना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। इसी कारण किसान पूरे दिन खेतों में मेहनत कर इस कार्य को पूरा करने में लगे हुए हैं।
छुट्टी का लाभ उठाकर कई बच्चे भी खेतों में पहुंचकर अपने माता-पिता की मदद कर रहे हैं। इस प्रक्रिया के माध्यम से उन्हें खेती का महत्व, श्रम का मूल्य और मिट्टी से जुड़े आत्मीय संबंध का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हो रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी "शेती टिकली तरच देश टिकेल" की भावना जीवंत है। यह दृश्य इस बात को रेखांकित करता है कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा का मजबूत आधार भी है।
पावस की इस उघड़ी का सदुपयोग करते हुए किसान कोलपनी का कार्य समय पर पूरा करने के प्रयास में जुटे हैं। वहीं, खेती में बच्चों की सहभागिता ग्रामीण संस्कृति की प्रेरणादायी तस्वीर प्रस्तुत कर रही है और नई पीढ़ी को खेती से जोड़ने का महत्वपूर्ण संदेश भी दे रही है।
प्राथमिक शिक्षा में कृषि विषय को शामिल किए जाने की आवश्यकता पर कृषी पदविकाधारक संघटना, महाराष्ट्र राज्य के संघटक समाधान म्हातुगडे ने कहा, "शेती टिकली तरच देश टिकेल. मुलांना लहानपणापासून शेतीची ओळख, श्रमाचे संस्कार आणि मातीशी नाते जपण्याची शिकवण मिळणे आवश्यक आहे. त्यासाठी प्राथमिक शाळेच्या अभ्यासक्रमात शेती शिक्षण हा विषय समाविष्ट करणे ही काळाची गरज आहे."
फोटो में पावस की उघड़ी के बाद खेतों में कोलपनी के कार्य में व्यस्त किसान दिखाई दे रहे हैं, जबकि छुट्टी का दिन होने से छोटे बच्चों ने भी अपने माता-पिता के साथ खेतों में उत्साहपूर्वक हाथ बंटाया।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
पत्रकारिता का दृष्टिकोण:
सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।
ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।
