2008 कर्जमाफी मामले में 44,759 किसानों को राहत की उम्मीद, सुप्रीम कोर्ट में 21 सितंबर को अंतिम सुनवाई
कोल्हापुर के 44,759 किसानों की 2008 कर्जमाफी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नाबार्ड को अंतिम अवसर दिया। अब 21 सितंबर 2026 की सुनवाई पर सभी की नजरें हैं।

कोल्हापुर जिले में वर्ष 2008 की केंद्र सरकार की कर्जमाफी योजना से अपात्र घोषित किए गए 44,759 किसानों के लिए राहत की उम्मीद फिर से जगी है। केडीसीसी बैंक के अध्यक्ष एवं वैद्यकीय शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने सर्वोच्च न्यायालय में मंगलवार, 14 जुलाई को हुई सुनवाई की प्रति प्राप्त होने के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस मामले की अंतिम सुनवाई 21 सितंबर 2026 को दोपहर दो बजे निर्धारित की गई है।
हसन मुश्रीफ ने बताया कि वर्ष 2008 में केंद्र सरकार ने कर्जमाफी योजना लागू की थी। कोल्हापुर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के 44,759 किसानों की 112 करोड़ 78 लाख रुपये की कर्जमाफी को नाबार्ड ने इस आधार पर अपात्र घोषित कर दिया था कि संबंधित किसानों ने स्वीकृत अधिकतम सीमा से अधिक ऋण लिया था। इसके बाद 31 मार्च 2012 को केडीसीसी बैंक से यह राशि नाबार्ड ने वापस ले ली थी।
इस कार्रवाई के खिलाफ अपात्र घोषित किसानों ने मुंबई उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। 30 जनवरी 2017 को मुंबई उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि केंद्र सरकार की कर्जमाफी योजना में कहीं भी यह उल्लेख नहीं था कि स्वीकृत अधिकतम सीमा से अधिक ऋण लेने वाले किसानों को कर्जमाफी का लाभ नहीं मिलेगा और न ही ऐसी कोई शर्त निर्धारित की गई थी। न्यायालय ने यह भी माना कि अन्य बैंकों के लिए यह मानदंड लागू नहीं किया गया, जबकि केवल कोल्हापुर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के बकायेदार किसानों पर ही इसे लागू किया गया, जो अन्यायपूर्ण है। इसके आधार पर उच्च न्यायालय ने संबंधित किसानों को कर्जमाफी का लाभ देने का आदेश दिया था।
मुंबई उच्च न्यायालय के इस निर्णय के विरुद्ध नाबार्ड ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की। हसन मुश्रीफ के अनुसार, इस निर्णय पर सर्वोच्च न्यायालय की ओर से कोई स्थगन आदेश नहीं होने के बावजूद कई तारीखें पड़ती रहीं और नाबार्ड की अपील लंबित रही। सर्वोच्च न्यायालय ने नाबार्ड और कोल्हापुर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक को आपसी चर्चा के माध्यम से समाधान निकालने का भी निर्देश दिया था। इसी क्रम में 4 मई 2026 को मुंबई स्थित नाबार्ड मुख्यालय में नाबार्ड के अध्यक्ष के. वी. शाजी के साथ बैठक हुई, लेकिन नाबार्ड अपनी पूर्व स्थिति पर कायम रहा।
उन्होंने कहा कि केडीसीसी बैंक ने यह पक्ष रखा कि वर्ष 2008 से संबंधित किसान कर्जमाफी की प्रतीक्षा कर रहे हैं और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है। बैंक ने यह भी कहा कि पूरे महाराष्ट्र में केवल कोल्हापुर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक पर ही यह शर्त लागू की गई, जो अन्यायपूर्ण है। हालांकि, इस प्रयास में कोई समाधान नहीं निकल सका।
मंगलवार, 14 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति जे. बी. पारडीवाला और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। नाबार्ड की ओर से देश के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एडवोकेट विक्रमजीत बनर्जी ने न्यायालय को बताया कि पूरा मामला केंद्र सरकार के सक्रिय और सकारात्मक विचाराधीन है तथा केंद्र सरकार इस विषय पर सकारात्मक दृष्टिकोण रखती है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से कोई सकारात्मक मार्ग और समाधान निकलने की उम्मीद है तथा जो भी निर्णय होगा, उसे सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए नाबार्ड को एक अवसर दिया जाए।
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार जो भी निर्णय लेगी, उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए नाबार्ड को अंतिम अवसर दिया जा रहा है। न्यायालय ने यह अपेक्षा भी व्यक्त की कि उचित और न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित करने के लिए नाबार्ड तथा केंद्र सरकार सभी संभावित प्रयास करें।
इस सुनवाई में नाबार्ड की ओर से देश के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रमजीत बनर्जी ने पक्ष रखा, जबकि केडीसीसी बैंक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी. ए. सुंदरम और वरिष्ठ अधिवक्ता शिवाजीराव जाधव ने पैरवी की। अब इस महत्वपूर्ण मामले की अंतिम सुनवाई 21 सितंबर 2026 को दोपहर दो बजे होगी, जिस पर 44,759 किसानों की नजरें टिकी हैं।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
पत्रकारिता का दृष्टिकोण:
सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।
ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।
