कोल्हापुर जिले में वर्ष 2008 की केंद्र सरकार की कर्जमाफी योजना से अपात्र घोषित किए गए 44,759 किसानों के लिए राहत की उम्मीद फिर से जगी है। केडीसीसी बैंक के अध्यक्ष एवं वैद्यकीय शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने सर्वोच्च न्यायालय में मंगलवार, 14 जुलाई को हुई सुनवाई की प्रति प्राप्त होने के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस मामले की अंतिम सुनवाई 21 सितंबर 2026 को दोपहर दो बजे निर्धारित की गई है।

हसन मुश्रीफ ने बताया कि वर्ष 2008 में केंद्र सरकार ने कर्जमाफी योजना लागू की थी। कोल्हापुर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के 44,759 किसानों की 112 करोड़ 78 लाख रुपये की कर्जमाफी को नाबार्ड ने इस आधार पर अपात्र घोषित कर दिया था कि संबंधित किसानों ने स्वीकृत अधिकतम सीमा से अधिक ऋण लिया था। इसके बाद 31 मार्च 2012 को केडीसीसी बैंक से यह राशि नाबार्ड ने वापस ले ली थी।

इस कार्रवाई के खिलाफ अपात्र घोषित किसानों ने मुंबई उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। 30 जनवरी 2017 को मुंबई उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि केंद्र सरकार की कर्जमाफी योजना में कहीं भी यह उल्लेख नहीं था कि स्वीकृत अधिकतम सीमा से अधिक ऋण लेने वाले किसानों को कर्जमाफी का लाभ नहीं मिलेगा और न ही ऐसी कोई शर्त निर्धारित की गई थी। न्यायालय ने यह भी माना कि अन्य बैंकों के लिए यह मानदंड लागू नहीं किया गया, जबकि केवल कोल्हापुर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के बकायेदार किसानों पर ही इसे लागू किया गया, जो अन्यायपूर्ण है। इसके आधार पर उच्च न्यायालय ने संबंधित किसानों को कर्जमाफी का लाभ देने का आदेश दिया था।

मुंबई उच्च न्यायालय के इस निर्णय के विरुद्ध नाबार्ड ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की। हसन मुश्रीफ के अनुसार, इस निर्णय पर सर्वोच्च न्यायालय की ओर से कोई स्थगन आदेश नहीं होने के बावजूद कई तारीखें पड़ती रहीं और नाबार्ड की अपील लंबित रही। सर्वोच्च न्यायालय ने नाबार्ड और कोल्हापुर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक को आपसी चर्चा के माध्यम से समाधान निकालने का भी निर्देश दिया था। इसी क्रम में 4 मई 2026 को मुंबई स्थित नाबार्ड मुख्यालय में नाबार्ड के अध्यक्ष के. वी. शाजी के साथ बैठक हुई, लेकिन नाबार्ड अपनी पूर्व स्थिति पर कायम रहा।

उन्होंने कहा कि केडीसीसी बैंक ने यह पक्ष रखा कि वर्ष 2008 से संबंधित किसान कर्जमाफी की प्रतीक्षा कर रहे हैं और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है। बैंक ने यह भी कहा कि पूरे महाराष्ट्र में केवल कोल्हापुर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक पर ही यह शर्त लागू की गई, जो अन्यायपूर्ण है। हालांकि, इस प्रयास में कोई समाधान नहीं निकल सका।

मंगलवार, 14 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति जे. बी. पारडीवाला और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। नाबार्ड की ओर से देश के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एडवोकेट विक्रमजीत बनर्जी ने न्यायालय को बताया कि पूरा मामला केंद्र सरकार के सक्रिय और सकारात्मक विचाराधीन है तथा केंद्र सरकार इस विषय पर सकारात्मक दृष्टिकोण रखती है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से कोई सकारात्मक मार्ग और समाधान निकलने की उम्मीद है तथा जो भी निर्णय होगा, उसे सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए नाबार्ड को एक अवसर दिया जाए।

सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार जो भी निर्णय लेगी, उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए नाबार्ड को अंतिम अवसर दिया जा रहा है। न्यायालय ने यह अपेक्षा भी व्यक्त की कि उचित और न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित करने के लिए नाबार्ड तथा केंद्र सरकार सभी संभावित प्रयास करें।

इस सुनवाई में नाबार्ड की ओर से देश के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रमजीत बनर्जी ने पक्ष रखा, जबकि केडीसीसी बैंक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी. ए. सुंदरम और वरिष्ठ अधिवक्ता शिवाजीराव जाधव ने पैरवी की। अब इस महत्वपूर्ण मामले की अंतिम सुनवाई 21 सितंबर 2026 को दोपहर दो बजे होगी, जिस पर 44,759 किसानों की नजरें टिकी हैं।

Pratahkal Bureau

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