बामणी में RAWE कार्यक्रम के तहत किसान संवाद और कृषि मार्गदर्शन को मिला उत्साहपूर्ण प्रतिसाद
बामणी में महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, राहुरी के RAWE कार्यक्रम के तहत आयोजित किसान संवाद एवं कृषि मार्गदर्शन कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों ने एकीकृत फसल प्रबंधन, जैविक खेती, मृदा परीक्षण और सरकारी योजनाओं पर किसानों का मार्गदर्शन किया तथा उनकी विभिन्न कृषि संबंधी समस्याओं का समाधान किया।

कोल्हापुर के बामणी गांव में आयोजित कृषि संवाद और मार्गदर्शन कार्यक्रम में उपस्थित कृषि महाविद्यालय के छात्र, विशेषज्ञ और स्थानीय किसान।
कोल्हापुर : विजय मोरबाळे
महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, राहुरी के अंतर्गत राजर्षी छत्रपती शाहू महाराज शासकीय कृषि महाविद्यालय, कोल्हापुर द्वारा ग्रामीण कृषि जागरूकता एवं कृषि औद्योगिक कार्यानुभव (RAWE) कार्यक्रम 2026–27 के तहत बामणी में आयोजित 'किसान संवाद एवं कृषि मार्गदर्शन कार्यक्रम' उत्साहपूर्ण वातावरण और किसानों की उत्स्फूर्त भागीदारी के साथ संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सरपंच सौ. अनुराधा पाटील ने की। इस अवसर पर उप कृषि अधिकारी एस. आर. कोईगडे, सहायक कृषि अधिकारी एम. बी. हजारे, पूर्व उपसरपंच आनंदा पाटील तथा ग्राम पंचायत के सदस्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं प्रतिमा पूजन से किया गया। इसके बाद सभी अतिथियों का पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधा भेंटकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम की प्रस्तावना में आयोजन के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
इस दौरान सहयोगी प्राध्यापक डॉ. ए. एस. बागडे ने प्रमुख फसलों में लगने वाले कीटों के एकीकृत प्रबंधन, रोकथाम के उपाय तथा प्रभावी नियंत्रण के संबंध में किसानों का मार्गदर्शन किया। वहीं, सहायक प्राध्यापक डॉ. एस. एम. शेंडे ने जैविक खेती, मृदा परीक्षण के महत्व, भूमि के स्वास्थ्य तथा संतुलित उर्वरक प्रबंधन से जुड़ी उपयोगी जानकारी किसानों को प्रदान की।
संवाद सत्र के दौरान किसानों ने खेती से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर अपने प्रश्न रखे। विशेषज्ञों ने उनकी शंकाओं का समाधान करते हुए आधुनिक तकनीक अपनाने, टिकाऊ कृषि पद्धतियों और उत्पादन बढ़ाने के लिए आवश्यक उपायों की जानकारी दी।
सहायक कृषि अधिकारी एम. बी. हजारे ने राज्य सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं, अनुदान योजनाओं तथा कृषि विभाग की ओर से संचालित उपक्रमों की जानकारी देते हुए किसानों से इन योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया।
अध्यक्षीय संबोधन में सरपंच अनुराधा पाटील ने कृषि महाविद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच प्रत्यक्ष संवाद से खेती को अधिक सक्षम, टिकाऊ और आधुनिक बनाने में सहायता मिलती है।
कार्यक्रम अधिकारी डॉ. एम. आर. खराडे तथा RAWE समन्वयक डॉ. बी. टी. कोलगणे के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नियोजन कृषिकन्या ज्ञानेश्वरी निकम, प्रिया कुलकर्णी, प्रियांका परमणे, रिद्धी काळे, सायली पवार और सायली काशीद ने किया। कार्यक्रम में बामणी क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों, ग्रामीणों और कृषि प्रेमी नागरिकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
फोटो : बामणी में आयोजित किसान संवाद एवं कृषि मार्गदर्शन कार्यक्रम में उपस्थित किसानों को कृषि विशेषज्ञ आधुनिक खेती, फसल संरक्षण, जैविक खेती तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
पत्रकारिता का दृष्टिकोण:
सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।
ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।
