पेंशन का हर रुपया समाजसेवा के नाम: ‘अखेरचा हा तुला दंडवत’ अभियान से 500 से अधिक परिवारों को मिला सहारा
कोल्हापुर के बाजीराव और सुमन हिरवे दंपति पिछले साढ़े तीन वर्षों से अपनी पेंशन समाजसेवा में समर्पित कर रहे हैं। ‘अखेरचा हा तुला दंडवत’ अभियान के जरिए 500 से अधिक परिवारों को अंतिम संस्कार के लिए निःशुल्क सहायता प्रदान की गई है।

कोल्हापुर के पैजारवाडी में अपनी पेंशन से जरूरतमंदों के लिए 'अखेरचा हा तुला दंडवत' अभियान चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता बाजीराव पांडुरंग हिरवे (बाएं) और उनकी पत्नी सुमन हिरवे (दाएं)।
जब अधिकांश लोग सेवानिवृत्ति के बाद अपने जीवन को आरामदायक बनाने की योजना बनाते हैं, वहीं कोल्हापुर जिले के पैजारवाडी निवासी बाजीराव पांडुरंग हिरवे और उनकी पत्नी सुमन हिरवे ने अपनी पूरी पेंशन समाजसेवा को समर्पित कर एक अनूठी मिसाल कायम की है। पिछले साढ़े तीन वर्षों से यह दंपति ‘अखेरचा हा तुला दंडवत’ अभियान के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक सामग्री निःशुल्क उपलब्ध करा रहा है।
स्वर्गीय शिक्षणमहर्षी पांडुरंग विठ्ठल हिरवे गुरुजी की स्मृति में शुरू किए गए इस अभियान के तहत अब तक 500 से अधिक दिवंगत व्यक्तियों के परिवारों को अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक संपूर्ण सामग्री उपलब्ध कराई जा चुकी है। इस सेवा का उद्देश्य दुःख की घड़ी में परिवारों की आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों को कम करना है।
जिला परिषद कोल्हापुर से लिपिक पद से सेवानिवृत्त हुए बाजीराव हिरवे को मिलने वाली पेंशन का उपयोग इसी सामाजिक कार्य में किया जाता है। अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक लकड़ी, उपले, कफन, मिट्टी के बर्तन, पूजन सामग्री सहित अन्य जरूरी वस्तुओं की व्यवस्था हिरवे दंपति स्वयं करते हैं और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाते हैं।
पैजारवाडी के अलावा आवळी, नावली, देवाळे, जेऊर, बोरिवडे, बादेवाडी, वेखंडवाडी और आंबवडे सहित लगभग 15 से 17 गांवों में यह अभियान लगातार संचालित किया जा रहा है। इस सेवा कार्य में केवल आर्थिक सहयोग ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत श्रम का भी महत्वपूर्ण योगदान है। उपलों का संग्रह, लकड़ी का भंडारण और आवश्यक सामग्री की तैयारी जैसे सभी कार्य हिरवे दंपति स्वयं करते हैं, ताकि किसी भी परिवार को अंतिम संस्कार के समय किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
उनके इस निस्वार्थ सामाजिक योगदान को शासन और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा भी सम्मानित किया गया है। सुमन हिरवे को महाराष्ट्र शासन का प्रतिष्ठित ‘अहिल्यादेवी होळकर पुरस्कार’ प्रदान किया जा चुका है। इसके अलावा रोटरी क्लब कोल्हापुर, महालक्ष्मी आधार फाउंडेशन सातारा तथा साप्ताहिक माणदेश दर्शन द्वारा भी उनके कार्यों का सम्मान किया गया है।
शाहूवाडी-पन्हाला क्षेत्र के विधायक डॉ. विनय कोरे का भी इस अभियान को समय-समय पर मार्गदर्शन प्राप्त होता रहा है। मानवता, सेवा भावना और सामाजिक उत्तरदायित्व की मिसाल बन चुका यह अभियान आज सैकड़ों परिवारों के लिए संबल साबित हो रहा है। हिरवे दंपति का यह प्रयास समाज में संवेदनशीलता और परोपकार की एक प्रेरणादायक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
पत्रकारिता का दृष्टिकोण:
सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।
ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।
