कोल्हापुर। कागल तालुका के बानगे गांव की कुश्ती परंपरा को नई पहचान मिली है। जय भवानी तालीम, बानगे कुश्ती संकुल की पहलवान अहिल्या शिंदे का अमेरिका में होने वाली यू-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के लिए 55 किलो भार वर्ग में भारतीय टीम में चयन हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से बानगे गांव सहित कोल्हापुर जिले के खेल क्षेत्र में खुशी का माहौल है।

18 से 24 सितंबर 2026 तक अमेरिका में यू-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप आयोजित होगी। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के लिए भारतीय टीम की चयन ट्रायल 31 अगस्त को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में हुई। ट्रायल में देशभर की प्रतिभाशाली महिला पहलवानों ने हिस्सा लिया। 55 किलो भार वर्ग में अहिल्या को हरियाणा की दो मजबूत पहलवानों से मुकाबला करना पड़ा। दबाव की स्थिति में भी अहिल्या ने दोनों प्रतिद्वंद्वियों को हराकर अपनी क्षमता साबित की और भारतीय टीम में जगह पक्की की।

अहिल्या शिंदे के लिए यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दूसरा महत्वपूर्ण अवसर है। इससे पहले वियतनाम में हुई अंतरराष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में उन्होंने कांस्य पदक जीतकर भारत का झंडा ऊंचा किया था। इस प्रदर्शन के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा और अब उन्हें विश्व चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है।

बानगे गांव को कुश्ती की समृद्ध परंपरा मिली है। इस मिट्टी से कई पहलवानों ने प्रशिक्षण लेकर जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। इसी कुश्ती परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अहिल्या ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम बढ़ाया है। स्थानीय तालीम, लगातार अभ्यास, शारीरिक फिटनेस और कुश्ती के तकनीकी कौशल के दम पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है।

अहिल्या फिलहाल जय भवानी तालीम, बानगे में कड़ा अभ्यास कर रही हैं। आगामी विश्व प्रतियोगिता को देखते हुए उनका प्रशिक्षण और अधिक तेज हो गया है। कुश्ती के दांव-पेच, ताकत, गति, बचाव और आक्रामक खेल पर वह विशेष ध्यान दे रही हैं।

अहिल्या की कुश्ती यात्रा को आकार देने में उनके प्रशिक्षकों और मार्गदर्शकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। एशियाई स्वर्ण पदक विजेता रविंद्र पाटील, वस्ताद तुकाराम चोपडे, भाऊ सावंत, वैभव तेली, आकाश नलवडे और संतोष हिरुगडे का उन्हें लगातार मार्गदर्शन मिल रहा है। उनके मार्गदर्शन में अहिल्या अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौती के लिए तैयार हो रही हैं।

वियतनाम में कांस्य पदक जीतने के बाद अब विश्व चैंपियनशिप में अहिल्या के प्रदर्शन पर सभी की नजरें हैं। भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए हुई चयन ट्रायल में उन्होंने जिस जिद, आत्मविश्वास और आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया, उसे देखते हुए अमेरिका की प्रतियोगिता में भी उनके दमदार प्रदर्शन की उम्मीद कुश्तीप्रेमियों को है।

अहिल्या के चयन से बानगे, कागल तालुका और कोल्हापुर जिले की कुश्ती का नावलौकिक और बढ़ा है। उनके चयन पर गांव के ग्रामीणों, कुश्तीप्रेमियों, तालीम मंडल के पदाधिकारियों, खेलप्रेमियों और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोगों ने बधाई दी है। अब अमेरिका में होने वाली विश्व प्रतियोगिता में अहिल्या भारत के लिए पदक जीतकर बानगे की कुश्ती परंपरा को नई ऊंचाई दिलाएं, ऐसी अपेक्षा व्यक्त की जा रही है।

फोटो : अमेरिका में होने वाली यू-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के लिए 55 किलो भार वर्ग में भारतीय टीम में चयनित बानगे की पहलवान अहिल्या शिंदे।

Vijay Morbale, Kolhapur

Vijay Morbale, Kolhapur

पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)

शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा

परिचय:

विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।

कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:

विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।

पत्रकारिता का दृष्टिकोण:

सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।

ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।

Next Story