सिद्धनेर्ली में कृषीकन्याओं ने शून्य ऊर्जा शीतकरण कक्ष का प्रदर्शन किया, किसानों को सिखाई कम लागत की तकनीक
सिद्धनेर्ली में RAWE कार्यक्रम के तहत कृषीकन्याओं ने शून्य ऊर्जा शीतकरण कक्ष का प्रदर्शन कर किसानों को बिना बिजली कृषि उपज सुरक्षित रखने की कम लागत वाली तकनीक समझाई।

तस्वीर में सिद्धनेर्ली में ईंटों से बने शून्य ऊर्जा शीतकरण कक्ष के पास कृषि छात्राएं और ग्रामीण किसान बैनर के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।
कोल्हापुर के सिद्धनेर्ली में राजर्षी छत्रपती शाहू महाराज शासकीय कृषि महाविद्यालय, कोल्हापुर की कृषीकन्याओं ने ग्रामीण कृषि कार्यानुभव (RAWE) कार्यक्रम के तहत किसानों के लिए शून्य ऊर्जा शीतकरण कक्ष (Zero Energy Cool Chamber) विषय पर प्रात्यक्षिक आयोजित कर कम लागत वाली उपयोगी तकनीक की जानकारी दी। इस दौरान बिना बिजली के सब्जियों, फलों और अन्य नाशवंत कृषि उत्पादों को अधिक समय तक ताजा रखने की विधि का प्रदर्शन किया गया।
प्रात्यक्षिक के दौरान शून्य ऊर्जा शीतकरण कक्ष की संरचना, निर्माण पद्धति, कार्यप्रणाली तथा इसके लाभों की विस्तार से जानकारी दी गई। कृषीकन्याओं ने बताया कि यह तकनीक बिना बिजली के बाष्पीभवन शीतकरण (Evaporative Cooling) के सिद्धांत पर कार्य करती है। इसके कारण कक्ष का तापमान बाहरी वातावरण की तुलना में लगभग 10 से 15 डिग्री सेल्सियस कम रहता है, जिससे सब्जियां, फल और अन्य नाशवंत कृषि उत्पाद लंबे समय तक ताजे बने रहते हैं तथा उनका भंडारण काल बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि शून्य ऊर्जा शीतकरण कक्ष के उपयोग से कृषि उपज की खराबी कम होती है, उत्पाद की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है और किसानों को होने वाले आर्थिक नुकसान में भी कमी आती है। विशेष रूप से छोटे और मध्यम किसानों के लिए यह कम लागत वाली, पर्यावरण अनुकूल और अत्यंत उपयोगी तकनीक है।
प्रात्यक्षिक के दौरान ईंट, रेत, बांस और बोरे की सहायता से शीतकरण कक्ष का निर्माण कैसे किया जाता है, इसका भी प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया गया। साथ ही किसानों को बताया गया कि फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम कर उत्पादन का बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त करने के लिए इस तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है।
कार्यक्रम में कृषीकन्याओं यशस्वी काळे, सायली काशीद, श्रेया काळे, केतकी भोसले, सलोनी बिक्कड और साक्षी जाधव ने किसानों को मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम में सिद्धनेर्ली क्षेत्र के किसान और ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। यह प्रात्यक्षिक किसानों को कम लागत में कृषि उत्पादों के सुरक्षित भंडारण की तकनीक उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
पत्रकारिता का दृष्टिकोण:
सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।
ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।
