फुले समृद्ध ग्राम' के रूप में चयनित कोगील बुद्रुक गांव में महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, राहुरी और कृषि विज्ञान केंद्र, कणेरी के संयुक्त तत्वावधान में प्रगतिशील किसानों के खेतों का दौरा और मार्गदर्शन कार्यक्रम उत्साहपूर्वक आयोजित किया गया। आधुनिक, वैज्ञानिक और सतत कृषि पद्धतियों के प्रसार के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने किसानों से संवाद कर विभिन्न फसल प्रणालियों, फल बाग प्रबंधन, जैविक खेती और आय बढ़ाने के उपायों पर विस्तृत मार्गदर्शन किया।

कार्यक्रम के दौरान महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, राहुरी के विस्तार शिक्षा संचालक डॉ. जी. के. ससाणे ने प्रगतिशील किसान आदिनाथ किणीकर के खेत का विशेष दौरा किया। उन्होंने मात्र 20 गुंठे क्षेत्र में 18 प्रकार के फलदार वृक्षों की खेती, उसके वैज्ञानिक नियोजन, जैविक पद्धति के उपयोग तथा उससे प्राप्त होने वाली सुनिश्चित आय की विस्तृत जानकारी ली। सीमित क्षेत्र में विविध फसलों का नियोजन कर आर्थिक रूप से सक्षम खेती विकसित करने के लिए उन्होंने आदिनाथ किणीकर के इस प्रयोग की विशेष सराहना की।

आदिनाथ किणीकर ने वर्ष 2018 से कृषि विज्ञान केंद्र, कणेरी के मार्गदर्शन में इस अभिनव प्रयोग की शुरुआत की थी, जो आज अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक मॉडल बन चुका है। वैज्ञानिकों ने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में कम क्षेत्र से अधिक और सतत आय प्राप्त करने के लिए इस प्रकार के प्रयोग अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।

इस अवसर पर उपस्थित किसानों को विभिन्न उन्नत किस्मों के बीजों का वितरण भी किया गया। साथ ही फसल नियोजन, जैविक खेती, फल बाग प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा उत्पादन लागत कम कर आय बढ़ाने के संबंध में विस्तार से मार्गदर्शन दिया गया।

कार्यक्रम में राजर्षी छत्रपति शाहू महाराज शासकीय कृषि महाविद्यालय, कोल्हापुर के रावे समन्वयक डॉ. बी. टी. कोलगणे तथा कृषि विज्ञान केंद्र, कणेरी के कृषि वैज्ञानिक पी. ए. काळे प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में कृषिकन्या ऋषिका माने, प्रांजल मांजरे, गौरी खाटपे, प्राजक्ता पाटील, संध्या पेटकर और पूजा नाळे ने सक्रिय सहयोग दिया। इस पहल से गांव के किसानों को आधुनिक और सतत कृषि तकनीकों की प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त हुई, जिससे उन्होंने संतोष व्यक्त किया।

फोटो : 'फुले समृद्ध ग्राम' कोगील बुद्रुक में प्रगतिशील किसान आदिनाथ किणीकर के 20 गुंठे में विकसित 18 प्रकार की फल बाग परियोजना का निरीक्षण करते हुए विस्तार शिक्षा संचालक डॉ. जी. के. ससाणे, डॉ. बी. टी. कोलगणे, कृषि वैज्ञानिक पी. ए. काळे तथा उपस्थित अधिकारी, कृषिकन्याएं और किसान।

Pratahkal Bureau

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