साहित्य, कला और संस्कृति के संगम का साक्षी बने कर्मवीर हिरे महाविद्यालय, गारगोटी में वार्षिक ‘कर्मयोग’ विशेषांक 2025-26 का भव्य प्रकाशन समारोह उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर आयोजित ‘स्नेहग़ज़ल’ कार्यक्रम ने उपस्थित साहित्यप्रेमियों और रसिकों को भावनाओं की एक अनूठी यात्रा पर ले जाकर मंत्रमुग्ध कर दिया।

महाविद्यालय के विद्यार्थियों की साहित्यिक, कलात्मक और सृजनात्मक अभिव्यक्तियों को मंच प्रदान करने वाले वार्षिक ‘कर्मयोग’ विशेषांक का लोकार्पण पूर्व प्राचार्य डॉ. अर्जुन कुंभार की प्रमुख उपस्थिति में किया गया। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण प्रसिद्ध ग़ज़लकार डॉ. स्नेहल कुलकर्णी द्वारा प्रस्तुत मराठी ग़ज़लों का प्रभावशाली सत्र रहा, जिसने श्रोताओं की भरपूर सराहना प्राप्त की।

समारोह में श्री मौनी विद्यापीठ के चेयरमैन मधुकर देसाई, कर्मचारी प्रतिनिधि डॉ. अरविंद चौगले, संचालक प्राचार्य डॉ. पी. बी. पाटील, अक्षरसागर साहित्य मंच के अध्यक्ष डी. वी. कुंभार, भुदरगड तालुका मराठी अध्यापक संघ के अध्यक्ष एम. एस. पाटील तथा संपादक मंडल के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. उदयकुमार शिंदे ने की।

कार्यक्रम का प्रारंभ डॉ. रामचंद्र मेढेकर द्वारा प्रस्तावना एवं अतिथियों के परिचय से हुआ। इसके बाद विशेषांक के संपादक डॉ. युवराज देवाळे ने अंक संपादन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। मुख्य अतिथि डॉ. अर्जुन कुंभार ने ‘कर्मयोग’ विशेषांक का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों की लेखन क्षमता, सृजनशीलता और साहित्यिक अभिरुचि की सराहना की।

इस अवसर पर अक्षरसागर साहित्य मंच, गारगोटी की ओर से महाविद्यालय को पुस्तक भेंट की गई। साथ ही विशेषांक के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले चित्रकार प्रा. सुधीर गुरव, कुलदीप शिंदे, संदीप साळवी, प्रा. गौतमी कांबळे तथा शैलेश देसाई का मान्यवरों के हाथों सम्मान किया गया।

इसके पश्चात आयोजित ‘स्नेहग़ज़ल’ कार्यक्रम में डॉ. स्नेहल कुलकर्णी ने मानवीय संवेदनाओं, जीवन के विविध अनुभवों और भावनात्मक पहलुओं को अभिव्यक्त करने वाली ग़ज़लों का प्रभावशाली प्रस्तुतिकरण किया। उनके सहज और प्रभावपूर्ण निवेदन ने प्रत्येक ग़ज़ल के भावार्थ को श्रोताओं तक गहराई से पहुंचाया। भुदरगड तालुका के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे साहित्यप्रेमियों ने इस कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया। इस दौरान संचालक डॉ. पी. बी. पाटील ने भी अपनी कुछ काव्य रचनाओं का पाठ किया।

अध्यक्षीय समापन भाषण में प्राचार्य डॉ. उदयकुमार शिंदे ने ‘कर्मयोग’ विशेषांक, प्रकाशन समारोह और ग़ज़ल कार्यक्रम की विस्तृत समीक्षा करते हुए साहित्य, संस्कृति और कला के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए ऐसे आयोजनों की आवश्यकता और महत्त्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी विभागों के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी, अक्षरसागर साहित्य मंच के पदाधिकारी, भुदरगड तालुका मराठी अध्यापक संघ के सदस्य तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी लेखक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रा. सोनाली महाजन ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. मृणाल देसाई ने किया।

कर्मवीर हिरे महाविद्यालय में आयोजित यह समारोह केवल एक विशेषांक के लोकार्पण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों की सृजनात्मक प्रतिभा, साहित्यिक अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा देने वाला प्रेरणादायी आयोजन बनकर उभरा।

Vijay Morbale, Kolhapur

Vijay Morbale, Kolhapur

पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)

शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा

परिचय:

विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।

कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:

विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।

पत्रकारिता का दृष्टिकोण:

सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।

ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।

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