कोल्हापुर जिले के कागल तालुका को दुष्काळग्रस्त तालुकों की सूची से बाहर रखे जाने के बाद कागल तालुका कांग्रेस कमेटी ने इसे ‘ट्रिगर-1’ पूरक सूची में शामिल करने की मांग की है। कमेटी ने तालुका में वास्तविक वर्षा, फसल की स्थिति, बांधों में जलसंचय और खरीफ फसलों को हुए नुकसान का वस्तुनिष्ठ आकलन कराने की मांग की है।

इस संबंध में तालुकाध्यक्ष एडवोकेट दयानंद नानासाहेब पाटील-नंद्याळकर के नेतृत्व में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री नामदार हसन मुश्रीफ को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन की प्रतियां पालकमंत्री नामदार प्रकाश आबिटकर, सांसद शाहू छत्रपति, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विधायक सतेज उर्फ बंटी पाटील और तहसीलदार अमरदीप वाकडे को भी दी गईं।

शासन ने 25 सितंबर 2026 को राज्य के 265 तालुकों को दुष्काळग्रस्त घोषित किया है। इनमें कोल्हापुर जिले के छह तालुके शामिल हैं। कागल तालुका को अत्यधिक वर्षा वाले तालुका के रूप में दुष्काळ की सूची से बाहर रखा गया है। कांग्रेस कमेटी ने ज्ञापन में दावा किया है कि इस वर्ष तालुका की वास्तविक स्थिति इससे अलग है।

कागल तालुका में औसतन 750 मिलीमीटर वर्षा अपेक्षित है, जबकि अब तक केवल करीब 420 मिलीमीटर बारिश हुई है। दूधगंगा और वेदगंगा नदी क्षेत्र के तालुका के मध्य और पूर्वी हिस्से के 45 से 50 गांवों में खरीफ फसलों के लिए आवश्यक वर्षा नहीं हुई। इससे फसल आनेवारी में बड़ी गिरावट आई है। सिद्धनेर्ली और कागल राजस्व मंडल के कई हिस्से दुष्काळ जैसी स्थिति में होने का उल्लेख ज्ञापन में किया गया है।

तालुका के पश्चिमी हिस्से में चिकोत्रा नदी घाटी के 30 से 35 गांव पहाड़ी और तीव्र ढलान वाले क्षेत्र में हैं। कम वर्षा के कारण बारिश पर निर्भर सोयाबीन और धान की फसलें सूखकर खराब हो गई हैं। कुछ किसानों ने दोबारा बुआई की, लेकिन भरणी के समय बारिश नहीं होने और तांबेरा रोग के कारण उत्पादन में बड़ी गिरावट की आशंका है। ज्ञापन में कहा गया है कि सोयाबीन की उपज प्रति एकड़ तीन क्विंटल से भी कम रहने की संभावना है।

चिकोत्रा परियोजना में बारिश के मौसम की शुरुआत में 32 प्रतिशत जलसंचय शेष था। इस वर्ष बांध में केवल 62 प्रतिशत जलसंचय हुआ है। इसके कारण सोयाबीन, धान, मक्का और मूंगफली जैसी खरीफ फसलों को 75 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने का दावा किया गया है। पर्याप्त पानी नहीं मिलने से गन्ने की वृद्धि भी प्रभावित हुई है और आगामी गन्ना रोपाई पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है। चिकोत्रा परियोजना पूरी क्षमता से नहीं भरने पर गर्मियों में उपसा बंदी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे 52 गांवों की जलापूर्ति का प्रश्न गंभीर होने की चिंता व्यक्त की गई है।

अपर्याप्त बारिश के कारण कई स्थानों पर दोबारा बुआई के बावजूद सोयाबीन और धान का अपेक्षित उत्पादन नहीं हुआ है। चारे की कमी के कारण पशुओं के चारे की समस्या पैदा हो गई है। वेदगंगा और चिकोत्रा नदियों पर बने कोल्हापुरी पद्धति के कुछ बंधारे खराब होने के कारण पानी जमा नहीं रह रहा है। तालुका के लघु सिंचाई तालाबों में भी केवल 20 से 25 प्रतिशत जलसंचय है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह जलसंचय करीब 70 प्रतिशत था।

कांग्रेस कमेटी ने मांग की है कि शासन केवल बारिश के आंकड़ों पर निर्भर न रहे, बल्कि वर्षा, फसल क्षेत्र, फसल नुकसान, सिंचाई परियोजनाओं में जलसंचय और चारे की उपलब्धता का समग्र आकलन करे। कृषि विभाग से वस्तुनिष्ठ रिपोर्ट मंगाकर कागल तालुका को दुष्काळग्रस्त तालुकों की ‘ट्रिगर-1’ पूरक सूची में शामिल किया जाए और किसानों को शासन की दुष्काळ राहत सुविधाएं लागू की जाएं।

फोटो : कागल तालुका को दुष्काळग्रस्त तालुकों की सूची में शामिल करने की मांग का ज्ञापन चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ को सौंपते कागल तालुका कांग्रेस कमेटी के तालुकाध्यक्ष एडवोकेट दयानंद पाटील-नंद्याळकर और पदाधिकारी।

Vijay Morbale, Kolhapur

Vijay Morbale, Kolhapur

पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)

शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा

परिचय:

विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।

कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:

विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।

पत्रकारिता का दृष्टिकोण:

सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।

ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।

Next Story