खेती पर लगी जल उपसा बंदी तत्काल हटाने की मांग, अन्यथा कांग्रेस ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
कागल तालुका में चिकोत्रा, दूधगंगा और वेदगंगा नदियों पर लागू कृषि जल उपसा बंदी के खिलाफ कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। किसानों की फसलों पर संकट गहराने के बीच आंदोलन की चेतावनी ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

कागल तालुका में चिकोत्रा, दूधगंगा और वेदगंगा नदियों से कृषि सिंचाई के लिए लागू की गई जल उपसा बंदी को लेकर किसानों में बढ़ती चिंता के बीच कांग्रेस ने सरकार और संबंधित विभागों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने मांग की है कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह बंदी तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाए तथा महावितरण द्वारा कृषि सिंचाई पंपों की बिजली आपूर्ति पूर्ववत बहाल की जाए। ऐसा नहीं होने पर तीव्र आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी गई है।
इस संबंध में कागल तालुका कांग्रेस अध्यक्ष एडवोकेट दयानंद पाटील-नंद्याळकर और तालुका महासचिव राहुल घरात ने महावितरण के कार्यकारी अभियंता (दक्षिण) डी. डी. शिंदे को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन की प्रतियां सांसद शाहू छत्रपति, विधायक सतेज उर्फ बंटी पाटील, अधीक्षक अभियंता चंद्रशेखर पाटोळे तथा कार्यकारी अभियंता (उत्तर) ज्योती देवकर को भी भेजी गई हैं।
ज्ञापन में कहा गया है कि कागल तालुका की कृषि व्यवस्था मुख्य रूप से दूधगंगा, वेदगंगा और चिकोत्रा नदियों पर बने कोल्हापुर टाइप बंधारों के जल पर निर्भर है। इस वर्ष जून माह में मानसून की अपेक्षित प्रगति नहीं होने के कारण सिंचाई विभाग ने उपलब्ध जल भंडार को ध्यान में रखते हुए 31 अगस्त तक पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना बनाई थी। इसके साथ ही कृषि उपयोग के लिए अंतिम सिंचाई चक्र देने की तैयारी भी की गई थी। हालांकि, इसी दौरान शासन स्तर से अचानक कृषि सिंचाई के लिए जल उपसा बंदी लागू कर दी गई।
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि वर्तमान समय में गन्ना फसल अपने विकास के अत्यंत महत्वपूर्ण चरण में है। इसके अलावा कई किसानों ने प्रारंभिक वर्षा के आधार पर सोयाबीन और धान की बुवाई भी कर दी है। लेकिन वर्षा की कमी के कारण इन फसलों को तत्काल सिंचाई की आवश्यकता है। यदि जल उपसा बंदी जारी रहती है तो गन्ने की वृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और हाल ही में की गई बुवाई भी प्रभावित होने का खतरा है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
कांग्रेस ने मांग की है कि चिकोत्रा, दूधगंगा और वेदगंगा नदियों पर कृषि सिंचाई के लिए लागू उपसा बंदी को तत्काल निरस्त किया जाए। साथ ही महावितरण द्वारा बंद की गई कृषि पंपों की बिजली आपूर्ति बहाल कर किसानों को नियमित सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
इस ज्ञापन पर किसान कांग्रेस जिला अध्यक्ष सागर कोंडेकर, ईगल तथा चित्रगुप्त प्रभावळकर, रणजीत खतकर, अमर चौगुले, राजेंद्र शिंदे, रणजीत पाटील, दीपक शेणवी, सुशांत पाटील, लक्ष्मण माळी, प्रकाश सावंत, अनिल संपकाळ, बाबुराव पाटील सहित अनेक पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर हैं।
कागल तालुका में सिंचाई संकट को लेकर कांग्रेस की यह चेतावनी ऐसे समय में सामने आई है जब किसानों की फसलें पानी के अभाव से जूझ रही हैं। अब प्रशासन और सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेते हैं, इस पर क्षेत्र के हजारों किसानों की निगाहें टिकी हुई हैं।

Pratahkal Bureau
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