सार्वजनिक सड़क पर निर्माण रोकने का अधिकार माणिकगढ़ सीमेंट कंपनी को किसने दिया, रास्ता खोलने की मांग तेज
जिवती के कुसुंबी माइंस क्षेत्र में सार्वजनिक सड़क पर विवाद गहराया। माणिकगढ़ सीमेंट कंपनी पर रास्ता रोकने के आरोप के बीच प्रशासनिक आदेशों के बाद भी मार्ग नहीं खुलने से आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

तस्वीर में जिवती के कुसुंबी माइंस क्षेत्र में सुरक्षा कर्मियों से घिरे एक बंद लोहे के गेट के बाहर खड़े ग्रामीण और स्थानीय प्रतिनिधि सुरक्षा गार्डों से बातचीत करते दिख रहे हैं।
जिवती तहसील के कुसुंबी माइंस क्षेत्र में मुख्यमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत स्वीकृत और निधि प्राप्त सड़क निर्माण कार्य को माणिकगढ़ सीमेंट कंपनी प्रबंधन द्वारा यह कहते हुए रोक दिए जाने का मामला सामने आया है कि संबंधित मार्ग उनकी मालिकी का है। इसको लेकर स्थानीय लोगों ने नोकारी-कुसुंबी-लिगणडोह मार्ग तत्काल सार्वजनिक उपयोग के लिए खोलने की मांग की है।
जनता का कहना है कि जिस मार्ग को बंद किया गया है, वह आज भी डामरीकरण के बिना मुरूम और मिट्टी का मार्ग है। ऐसे में इसे सार्वजनिक बांधकाम विभाग का मार्ग बताना "चोर की उल्टी बांसुरी" जैसा है। बताया गया कि वर्ष 1947, 1964, 1977 और 1984 में शासन की ओर से विभिन्न एकत्रीकरण और बंदोबस्त संबंधी माप किए गए, लेकिन बॉम्बे जरी-कुसुंबी क्षेत्र के किसी भी नक्शे में इस मार्ग की नोंद नहीं है।
भूमि विवाद समाप्त करने के उद्देश्य से तत्कालीन जिलाधिकारी वसुमना पंथ ने 29 अप्रैल 2020 को बैठक लेकर निर्देश दिए थे कि बॉम्बे जरी के किसानों की भूमि की माप कर संबंधित आदिवासियों की उपस्थिति में फोटो लिए जाएं तथा चिन्हित स्थानों पर पत्थर गाड़े जाएं। इसके बाद वन विभाग, महसूल विभाग, पुलिस विभाग और किसानों की उपस्थिति में सर्वे नंबर 43 से 48 तक की पूरी माप की गई। माप रिपोर्ट में सर्वे नंबर 47 और 48 में सड़क निर्माण होने का उल्लेख किया गया है।
मामले में यह भी कहा गया है कि संबंधित क्षेत्र कंपार्टमेंट नंबर 36 में आता है और इसकी मालिकी वन विभाग की है। आरोप है कि वन विभाग के किसी सक्षम कार्यालय से सार्वजनिक बांधकाम विभाग अथवा अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी ने पूर्व अनुमति नहीं ली। साथ ही आदिवासी कोलाम समुदाय के किसानों की भूमि से सड़क बनाते समय न तो भूमि अधिग्रहण किया गया और न ही किसी प्रकार का मुआवजा दिया गया। आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत से कंपनी ने भारी वाहनों की आवाजाही के लिए यह मार्ग तैयार किया और वर्तमान में उसका उपयोग अपने औद्योगिक कार्यों के लिए कर रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार नोकारी-कुसुंबी-आसापुर जाने वाला सार्वजनिक मार्ग निजामकालीन फसली नक्शे तथा वर्ष 1964 के भूमापन नक्शे में निस्तार अधिकार वाले सार्वजनिक मार्ग के रूप में दर्ज है। इसके अलावा 17 अगस्त 1981 को महाराष्ट्र शासन द्वारा किए गए लीज करार में भी स्पष्ट उल्लेख है कि यह मार्ग सार्वजनिक प्रयोजन के लिए रहेगा और इस पर किसी प्रकार का निर्माण नहीं किया जा सकेगा।
इसी संदर्भ में 20 जुलाई 2020 को तहसीलदार राजुरा ने आदेश पारित कर अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी के माणिकगढ़ खदान परिसर स्थित मार्ग पर किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाकर सड़क को सार्वजनिक उपयोग के लिए खोलने के निर्देश दिए थे। आरोप है कि आर्थिक रूप से सक्षम कंपनी ने अपील का आधार बनाकर चार वर्षों तक मामला लंबित रखा तथा मार्ग पर बनाए गए अवैध प्रवेश द्वार और अन्य निर्माण नहीं हटाए।
इसके बाद उपविभागीय अधिकारी ने 23 जून 2026 को नया आदेश जारी करते हुए पूर्व तहसीलदार के आदेश को बरकरार रखा। इसके बावजूद स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सार्वजनिक मार्ग आठ से दस गांवों को जोड़ता है तथा राजुरा, कोरपना और जिवती तहसीलों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, लेकिन कंपनी की मनमानी के कारण इस पर लगातार अवरोध उत्पन्न किए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि न्यायालय से मनाही आदेश मिलने का हवाला देकर किसानों को अपने खेतों तक जाने से भी रोका जा रहा है।
जन सत्याग्रह संगठन के आबिद अली ने उपविभागीय अधिकारी और पुलिस विभाग से नोकारी-कुसुंबी-आसापुर मार्ग तत्काल सार्वजनिक उपयोग के लिए खोलने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मार्ग नहीं खोला गया तो 30 जुलाई को क्षेत्र के लोग "रास्ता खोलो आंदोलन" शुरू करेंगे।

Pratahkal Bureau
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