इंदेवाड़ी-सिरसवाड़ी सड़क घोटाला: कागजों में पूरा दिखाकर लाखों के बिल, दो इंजीनियर निलंबित
जालना के इंदेवाड़ी-सिरसवाड़ी सड़क मामले में बिना निर्माण लाखों के बिल निकालने के आरोप पर दो इंजीनियर निलंबित, 200 से अधिक सड़क परियोजनाएं जांच के घेरे में।

जालना जिले में इंदेवाड़ी से सिरसवाड़ी सड़क निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि सड़क का वास्तविक निर्माण किए बिना ही कागजों में कार्य पूर्ण दर्शाकर लाखों रुपये के बिल निकाल लिए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. कृष्णकांत कनवारिया ने निर्माण विभाग के दो अभियंताओं को निलंबित कर दिया है। शनिवार, 4 जुलाई 2026 को सुबह 10 बजे प्राप्त जानकारी के अनुसार इस कार्रवाई के बाद जिला परिषद के निर्माण विभाग में कथित अनियमितताओं को लेकर फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
जिला नियोजन समिति के निधि से जालना तालुका के इंदेवाड़ी से सिरसवाड़ी सड़क निर्माण के लिए राशि स्वीकृत की गई थी। आरोप है कि सड़क का काम किए बिना ही संबंधित कार्य के लाखों रुपये के बिल निकाल लिए गए। इस मामले के सामने आने के बाद जिला परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. कृष्णकांत कनवारिया ने जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में दोष प्रथमदृष्टया पाए जाने पर उप अभियंता अनिल डांगे और कनिष्ठ अभियंता सूरजकुमार हरणे को निलंबित कर दिया गया।
इस मामले के बाद कई महत्वपूर्ण सवाल भी सामने आए हैं। यदि इंदेवाड़ी से सिरसवाड़ी सड़क का वास्तविक निर्माण नहीं हुआ, तो कार्य की मापन पुस्तिका किसने भरी, कार्य पूर्ण होने का प्रमाणपत्र किसने जारी किया, बिलों को प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति कैसे मिली तथा बिना स्थल निरीक्षण के भुगतान कैसे किया गया। इन सभी पहलुओं की जांच की मांग तेज हो गई है। साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि केवल दो अभियंताओं के निलंबन तक कार्रवाई सीमित न रखकर पूरे वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच कराई जाए।
जिला नियोजन समिति के निधि से स्वीकृत ग्रामीण सड़क विकास एवं सुदृढ़ीकरण कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की शिकायतें जिला परिषद को प्राप्त हुई हैं। जानकारी के अनुसार पिछले तीन वर्षों से जिले की 200 से अधिक सड़क परियोजनाएं लंबित हैं। कई स्थानों पर सड़क निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हुआ, जबकि कई परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर सभी कार्यों की जांच के आदेश दिए गए हैं और इसके लिए अलग जांच दल गठित किया गया है।
पिछले तीन वर्षों में स्वीकृत तथा लंबित 200 से अधिक सड़क परियोजनाओं की जांच के लिए 10 टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें मौके पर पहुंचकर कार्य की गुणवत्ता, वास्तविक प्रगति, व्यय, भुगतान तथा अभिलेखों का सत्यापन करेंगी। जिला परिषद प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इससे संबंधित ठेकेदारों के साथ-साथ अधिकारियों और कर्मचारियों में भी हलचल बढ़ गई है।
इस प्रकरण ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि बिना सड़क बनाए लाखों रुपये के बिल केवल ठेकेदार के स्तर पर कैसे निकल सकते हैं। किसी भी सरकारी कार्य के भुगतान से पहले निरीक्षण, मापन, अभिलेखीकरण तथा विभिन्न स्तरों से स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि इस मामले में ठेकेदार के अलावा किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही तथा मामला केवल दो अभियंताओं तक सीमित है या इसमें अन्य लोगों की भी संलिप्तता है।
पिछले तीन वर्षों में स्वीकृत जिले की 200 से अधिक सड़क परियोजनाएं अब जांच के दायरे में आ चुकी हैं। इन कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे में जिला परिषद के निर्माण विभाग में कथित भ्रष्टाचार और लापरवाही से जुड़े अन्य मामलों के भी उजागर होने की संभावना जताई जा रही है। वास्तविक कार्य, अभिलेखों और किए गए भुगतान का मिलान होने के बाद जांच में और भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क और विकास के लिए सरकार करोड़ों रुपये का बजट उपलब्ध कराती है। यदि सड़क बनाए बिना केवल कागजों में कार्य पूर्ण दिखाकर भुगतान किया गया है, तो यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं बल्कि ग्रामीण विकास के लिए स्वीकृत सार्वजनिक धन के उपयोग पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। इंदेवाड़ी से सिरसवाड़ी सड़क प्रकरण में दो अभियंताओं का निलंबन फिलहाल कार्रवाई की शुरुआत माना जा रहा है। अब जिले की 200 से अधिक सड़क परियोजनाओं की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और दोषियों के विरुद्ध कितनी कठोर कार्रवाई होती है, इस पर पूरे जिले की नजर बनी हुई है।

Pratahkal Bureau
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