जालना शहर के प्रमुख मार्ग पर स्थित महानगरपालिका से नीलम टॉकीज तक का पुल इन दिनों अपनी जर्जर अवस्था के कारण न केवल राहगीरों के लिए खतरा बन गया है, बल्कि स्थानीय व्यापारियों के लिए एक स्थायी दुःस्वप्न में तब्दील हो गया है। बीते कुछ समय से उपेक्षित पड़े इस पुल और उसके निकट स्थित नाले की बदहाली को लेकर अब स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के युवक शहराध्यक्ष राजेंद्र जाधव ने इस मसले पर प्रशासन की निष्क्रियता को आड़े हाथों लेते हुए अविलंब कार्रवाई की मांग उठाई है।

पिछले वर्ष मानसून के दौरान हुई मूसलाधार बारिश ने इस क्षेत्र की भयावह स्थिति को उजागर कर दिया था। पुल की अनुचित बनावट और नालों में कचरे के जमाव के कारण बारिश का पानी सीधे स्थानीय दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में जा घुसा, जिससे व्यापारियों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी थी। इस दर्दनाक अनुभव के बाद भी, पुल की मरम्मत या पुनर्निर्माण का कार्य फाइलों में ही दबकर रह गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस गंभीर खतरे से प्रशासन पूरी तरह बेखबर बना हुआ है। नाले की नियमित सफाई न होने से आगामी बारिश में फिर से वही जलभराव की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है, जिससे व्यापारियों के समक्ष पुन: आर्थिक संकट का खतरा मंडराने लगा है।

राजेंद्र जाधव ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि पिछले साल हुए नुकसान की भरपाई भी अभी तक अधिकांश व्यापारियों को नहीं मिल पाई है। नगर निगम प्रशासन को इस संदर्भ में कई बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, परंतु अब तक कोई भी ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। प्रशासनिक उदासीनता के चलते स्थिति विकराल होती जा रही है। उन्होंने प्रशासन को अंतिम चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि जल्द ही पुल की मरम्मत और नाले की समुचित सफाई का कार्य आरंभ नहीं किया गया, तो नागरिकों और व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए वे तीव्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।

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