जालना जलकवच अभियान के तहत बदनापुर में रेशम खेती कार्यशाला संपन्न, किसानों को आय बढ़ाने के नए अवसरों की जानकारी
जालना जलकवच अभियान-2026 के तहत बदनापुर में आयोजित रेशम खेती कार्यशाला में किसानों और महिलाओं को कम पानी में अधिक आय देने वाली खेती की जानकारी दी गई। जानिए कैसे यह पहल कृषि क्षेत्र में नया बदलाव ला सकती है।

बदनापुर पंचायत समिति सभागार में आयोजित कार्यशाला में उपस्थित किसानों और महिला समूहों को रेशम विकास अधिकारी अजय मोहिते जल संरक्षण और रेशम उत्पादन के आर्थिक महत्व की जानकारी देते हुए।
जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और किसानों की आय में वृद्धि को केंद्र में रखते हुए जालना जलकवच अभियान-2026 तथा आकांक्षित तालुका कार्यक्रम के अंतर्गत बदनापुर में रेशम खेती विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया। पंचायत समिति सभागार, बदनापुर में आयोजित इस कार्यशाला में किसानों, महिला समूहों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता दर्ज कराई।
एल-नीनो के संभावित प्रभावों को ध्यान में रखते हुए जिला कलेक्टर आशिमा मित्तल के मार्गदर्शन में संचालित जालना जलकवच अभियान के तहत कम पानी में टिकाऊ और लाभकारी कृषि व्यवसायों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह पहल की गई। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों को ऐसी खेती पद्धतियों से जोड़ना था, जो जल संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी अधिक लाभकारी सिद्ध हों।
कार्यक्रम में तालुका क्षेत्र के किसान, किसान समूह, महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्याएं, उमेद अभियान से जुड़ी महिलाएं, कृषि सखियां, युवा तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यशाला में रेशम विकास अधिकारी अजय मोहिते ने रेशम खेती के आर्थिक महत्व, शहतूत की खेती, रेशम कीट पालन, शासकीय अनुदान योजनाओं, बाजार उपलब्धता तथा रोजगार सृजन की संभावनाओं पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया। वहीं केंद्रीय रेशम बोर्ड के डॉ. अंकुश गाडगे ने रेशम उत्पादन की तकनीकी प्रक्रियाओं, उत्पादन प्रबंधन, आधुनिक तकनीकों के उपयोग तथा किसानों के लिए उपलब्ध विभिन्न योजनाओं की जानकारी साझा की।
पंचायत समिति बदनापुर की समूह विकास अधिकारी ज्योति एन. राठोड ने जालना जलकवच अभियान के अंतर्गत संचालित सप्त कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा कि रेशम खेती जैसी टिकाऊ और आयवर्धक कृषि पद्धतियों को अपनाकर किसान तथा महिलाएं अपने उत्पादन और आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा दे सकती हैं। उन्होंने उपस्थित महिलाओं से रेशम खेती को अपनाने और कृषि आधारित आय के नए स्रोत विकसित करने का आह्वान किया।
कार्यशाला में यह भी रेखांकित किया गया कि रेशम खेती कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने वाली तथा महिलाओं के लिए भी उपयुक्त व्यवसायिक कृषि प्रणाली है। इसी कारण यह खेती पद्धति जल सुरक्षा, फसल विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने जैसे जालना जलकवच अभियान के प्रमुख उद्देश्यों को मजबूती प्रदान कर सकती है।
बदनापुर के समूह विकास अधिकारी ज्योति एन. राठोड के मार्गदर्शन में आयोजित यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बदनापुर तालुका के रेशम अधिकारी डॉ. गोविंद गीते भी उपस्थित रहे। आयोजन की सफलता के लिए पंचायत समिति बदनापुर, उमेद अभियान, कृषि विभाग और रेशम विभाग ने समन्वित रूप से कार्य किया।
“कम पानी में अधिक उत्पादन—रेशम खेती की ओर बढ़ते कदम” के संदेश के साथ आयोजित इस कार्यशाला ने किसानों के बीच जल साक्षरता, वैकल्पिक कृषि व्यवसाय और टिकाऊ खेती के प्रति जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण प्रयास किया।

Pratahkal Bureau
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