जालना में ड्रोन से होगी हरियाली: ‘ड्रोन सीडिंग 2026’ से ओसाड डोंगरों को मिलेगा नया जीवन
जालना में बढ़ते प्रदूषण और वृक्षों की कमी से ओसाड हो रहे डोंगरों को फिर से हरा-भरा करने के लिए 'जालना फस्ट' ने ड्रोन तकनीक का सहारा लिया है। 'ड्रोन सीडिंग 2026' अभियान के तहत दुर्गम पहाड़ियों पर बीजों का छिड़काव किया गया। जानें क्या है यह तकनीक।

जालना के बदनापुर में ड्रोन सीडिंग अभियान के दौरान उपस्थित गणमान्य व्यक्ति और तकनीक का प्रदर्शन।
जालना, 12 जुलाई। बढ़ते शहरीकरण, बेतहाशा वृक्षों की कटाई और जलवायु परिवर्तन के कारण जालना जिले के पहाड़ी क्षेत्रों का हरित आवरण तेजी से घट रहा है। प्राकृतिक रूप से बीजों के प्रसार और नए पौधों के पनपने की प्रक्रिया मंद पड़ने से कई डोंगर ओसाड हो चुके हैं। इस गंभीर स्थिति से निपटने और पर्यावरण संरक्षण में आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग करने के उद्देश्य से 'जालना फस्ट' द्वारा 'ड्रोन सीडिंग 2026' नामक एक अभिनव अभियान शुरू किया गया है।
इस अभियान के तहत बदनापुर तहसील के खादगांव स्थित एम.आई.डी.सी. फेज-3 के समीपवर्ती वनक्षेत्र और शासकीय भूमि पर अत्याधुनिक ड्रोन की मदद से बीज प्रसारण किया गया। इसमें दुर्गम और ऐसे पहाड़ी ढलानों को प्राथमिकता दी गई, जहाँ पारंपरिक तरीके से वृक्षारोपण करना कठिन या असंभव है। इन क्षेत्रों में स्थानीय और भारतीय वृक्ष प्रजातियों के उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का छिड़काव किया गया।
अभियान के पहले ही दिन लगभग 25 हेक्टेयर क्षेत्र में 250 किलो बीजों का प्रसारण किया गया। अनुमान है कि आगामी वर्षा के दौरान ये बीज अंकुरित होंगे, जिससे यह परिसर फिर से हरा-भरा और वृक्षसंपन्न बन सकेगा। ड्रोन सीडिंग के लिए वड, पिंपळ, लिंब, चिंच, सीताफळ, पेरू, करंज, अंमलतास, खैर, अर्जुन और पळस जैसे स्थानीय और भारतीय वृक्षों का चयन किया गया है, जो कम पानी में पनपते हैं। इन वृक्षों से न केवल मृदा संरक्षण होगा, बल्कि भूजल पुनर्भरण, कार्बन अवशोषण और जैवविविधता बढ़ने के साथ ही वन्यजीवों व पक्षियों को प्राकृतिक आवास भी मिलेगा।
पहाड़ी व दुर्गम इलाकों में मानव श्रम के माध्यम से वृक्षारोपण करना समय लेने वाला और खर्चीला होता है, ऐसे में ड्रोन तकनीक एक प्रभावी विकल्प बनकर उभरी है। इस पहल से पर्यावरण संवर्धन और भावी पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध हरित वारसा तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। तकनीकी और सामाजिक भागीदारी का यह अनूठा संगम अन्य संस्थाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
इस अवसर पर ज्येष्ठ उद्योजक सुनीलभाई रायठ्ठा, कुंडलिका सीना फाऊंडेशन के उदय शिंदे, जालना फस्ट के कृष्णा बगडिया, 100 सोशल क्लब के डॉ. विठ्ठल राजकर, प्रा. मोहन शिंदे, समस्त महाजन के सुदाम खुणे, आकाश, सचीन बसैये, वन विभाग के मधुकर ढाकणे, वृक्षसंजीवनी फाऊंडेशन के ब्रदीनाथ जाधव, सचीन पारे, प्राईम ड्रोन्स के अमोल पाटील और विनोदराय इंजिनिअर्स के निवृत्ती गजर सहित विविध क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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