जालना में जादूटोणा विरोधी कानून के सख्त क्रियान्वयन का निर्देश
अपर जिलाधिकारी रमेश मिसाल ने कहा, अंधविश्वास और अघोरी प्रथाओं के नाम पर लोगों को ठगने और शोषण करने वालों के खिलाफ दर्ज होंगे आपराधिक मामले।

जालना स्थित जिला अधिकारी कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान अपर जिलाधिकारी रमेश मिसाल कानून की समीक्षा करते हुए।
इक्कीसवीं सदी के वैज्ञानिक युग में भी समाज में फैली अंधविश्वास की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रशासन को आज भी अमानवीय प्रथाओं के खिलाफ कड़ा रुख अपनाना पड़ रहा है। जालना में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में अपर जिलाधिकारी रमेश मिसाल ने 'महाराष्ट्र नरबलि और अन्य अमानवीय, अनिष्ट और अघोरी प्रथाओं तथा जादूटोणा के प्रतिबंध और उनके समूल उच्चाटन अधिनियम, 2013' के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। जिला अधिकारी कार्यालय में संपन्न हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त कुरीतियों पर प्रहार करना और नागरिकों को शोषण से बचाना था।
बैठक के दौरान अपर जिलाधिकारी रमेश मिसाल ने स्पष्ट किया कि अंधविश्वास और जादूटोणे के नाम पर लोगों को ठगने या प्रताड़ित करने वालों के लिए कानून अत्यंत सख्त है। उन्होंने जानकारी दी कि नरबलि देना, भूतबाधा या झाड़-फूंक के नाम पर शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न करना, चमत्कारों का झूठा दावा कर आर्थिक शोषण करना या किसी महिला को डायन बताकर उसका अपमान करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आते हैं। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर तीन महीने से लेकर सात साल तक की कारावास की सजा और आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान है।
प्रशासनिक स्तर पर इस कानून के प्रचार-प्रसार के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया गया है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अधिनियम किसी धर्म, पूजा, प्रार्थना या धार्मिक रीति-रिवाजों के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य उन अमानवीय प्रथाओं को रोकना है जो शोषण और ठगी का कारण बनती हैं। अंत में, प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके आस-पास कोई ऐसी घटना घटित होती है, तो वे निडर होकर निकटतम पुलिस स्टेशन, जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय या जिलाधिकारी कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समाज को इन कुरीतियों के जाल से मुक्त किया जा सके।

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