मुंबई। मुंबई के वर्ली इलाके में भारतीय नौसेना के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान INS Trata के पास प्रस्तावित बहुमंजिला इमारत के पुनर्विकास को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठ गया है। केंद्र सरकार ने आरोप लगाया है कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने नौसेना की आपत्तियों और रक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के बावजूद इस परियोजना को निर्माण की अनुमति दी। केंद्र की आशंका है कि इमारत से नौसेना प्रतिष्ठान की संवेदनशील गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है, जिससे सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा हो सकता है।

यह मामला मुंबई के वर्ली स्थित सस्मिरा रोड पर वृंदावन को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के पुनर्विकास से जुड़ा है। केंद्र सरकार के अनुसार, प्रस्तावित इमारत INS Trata से लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित है। यह प्रतिष्ठान पश्चिमी नौसेना कमान के अंतर्गत आता है। सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि नई बहुमंजिला इमारत से सैन्य प्रतिष्ठान और वहां होने वाली गतिविधियों को सीधे देखा जा सकता है। इससे संवेदनशील गतिविधियों की निगरानी किए जाने और रक्षा प्रतिष्ठान की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका है।

केंद्र ने अपनी याचिका में कहा है कि प्रस्तावित इमारत से नौसेना प्रतिष्ठान की विभिन्न साइटों का दृश्य उपलब्ध होगा। वहां सैन्य वाहन, नए गोला-बारूद और अन्य उपकरण मौजूद हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में इनसे जुड़ी गतिविधियों और आवाजाही को गोपनीय रखा जाता है। सरकार का दावा है कि इमारत की स्थिति के कारण इन गतिविधियों पर नजर रखे जाने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

मामले की शुरुआत वर्ष 2007 में प्रस्तुत प्रारंभिक प्रस्ताव से जुड़ी है। केंद्र के अनुसार, उस समय पश्चिमी नौसेना कमान मुख्यालय ने प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद वर्ष 2018 में सोसाइटी ने संशोधित योजना प्रस्तुत की, जिसमें 148.43 मीटर ऊंची इमारत बनाने का प्रस्ताव था। इस योजना को नौसेना कमान मुख्यालय ने अस्वीकार कर दिया। इसके बावजूद BMC ने वर्ष 2018, 2019 और 2022 में संशोधित प्रस्ताव दोबारा भेजे। केंद्र का आरोप है कि इन प्रस्तावों में इमारत की ऊंचाई बढ़ाई गई, जबकि नौसेना पहले ही आपत्ति जता चुकी थी।

केंद्र सरकार का आरोप है कि नौसेना की आपत्तियों के बावजूद BMC ने वर्ष 2023 में बिना नौसेना से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) प्राप्त किए निर्माण की अनुमति दे दी। सरकार ने रक्षा मंत्रालय के 18 मई 2011 के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा है कि रक्षा प्रतिष्ठान के 100 मीटर के दायरे में किसी भी निर्माण और 500 मीटर के दायरे में चार मंजिल से अधिक ऊंची इमारत के निर्माण के लिए निर्धारित शर्तों के तहत रक्षा विभाग की NOC आवश्यक है।

केंद्र ने बॉम्बे हाईकोर्ट से BMC की ओर से दी गई निर्माण अनुमति रद्द करने और निर्माण को ध्वस्त करने का अनुरोध किया है। साथ ही, मामले की सुनवाई के दौरान निर्माण कार्य पर अंतरिम रोक लगाने की मांग भी की गई है। सरकार का कहना है कि नौसेना प्रतिष्ठान के निकट प्रस्तावित ऊंची इमारत से उत्पन्न सुरक्षा संबंधी आशंकाओं पर गंभीरता से विचार किया जाना आवश्यक है।

वर्ली की इस परियोजना को लेकर उठा विवाद शहरी पुनर्विकास की अनुमति और रक्षा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के बीच संतुलन से जुड़ा है। अब इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष केंद्र की आपत्तियों, BMC की अनुमति और नौसेना प्रतिष्ठान से निकटता के आधार पर उठाए गए सुरक्षा संबंधी सवालों पर विचार होना है।

Pratahkal Bureau

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