कोरपना तालुका और आसपास के क्षेत्रों में अवैध रेती और मुरम तस्करी ने जिस तरह से जाळ फैलाया है, उसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। लगातार बढ़ती तस्करी, नदियों से अनधिकृत उत्खनन और रात के अंधेरे में चलने वाली बिना अनुमति की वाहन गतिविधियों ने स्थानीय जनजीवन सहित पर्यावरण को गहरी चोट पहुंचाई है। बढ़ते गैरकानूनी व्यापार के पीछे महसूल विभाग की ढिलाई और कथित उदासीनता प्रमुख कारण मानी जा रही है।

नदीपात्रों से बिना अनुमति रेती का उत्खनन, नियमों को ताक पर रखकर टिप्पर द्वारा रात में बड़े पैमाने पर परिवहन, बोगस चालानों का उपयोग और नदी किनारों पर अवैध मार्ग बनाकर अवैध गतिविधियों को अंजाम देना—ये सभी प्रकार बीते कुछ महीनों में तेजी से बढ़े हैं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि प्रशासनिक पथक समय–समय पर कार्रवाई तो करते हैं, परंतु वे केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है। जप्त किए गए वाहन कुछ ही दिनों में पुनः मार्गों पर बेधड़क दौड़ते दिखाई देते हैं, जिससे तस्करों का मनोबल और बढ़ता है।

नागरिकों का कहना है कि रेती घाटों के सर्वेक्षण, लाइसेंसिंग, ऑनलाइन अनुमति व्यवस्था, परिवहन नियंत्रण और जांच चौकियों की प्रणाली में गंभीर खामियां मौजूद हैं। घाटों की सही नोंद, माप और अनुमति जांच की कठोर व्यवस्था न होने से अधिकृत और अवैध गतिविधियों के बीच की रेखा पूरी तरह धुंधली हो चुकी है। परिणामस्वरूप, सरकार को बड़ी मात्रा में राजस्व की हानि हो रही है, जबकि रेती–मुरम माफिया लगातार फल–फूल रहा है।

पर्यावरण विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि नदीपात्रों में अनियंत्रित उत्खनन जलप्रवाह में परिवर्तन, जलस्तर में गिरावट, नदी किनारों का कटाव, जैवविविधता पर दुष्परिणाम और पेयजल संकट को जन्म दे रहा है। पहले से कम वर्षा वाले और पानी की समस्या झेल रहे कोरपना क्षेत्र में यह अवैध दोहन भविष्य में गंभीर जलसंकट का रूप ले सकता है।

कई नागरिकों ने तहसील कार्यालय और संबंधित महसूल अधिकारियों को लिखित शिकायतें भी दीं, लेकिन आरोप है कि इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच किए बिना मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। घाटों पर तैनात पहरेदारों, तलाठी–मंडलाधिकारियों और परिवहन जांच दल की कार्यप्रणाली पर भी लोगों ने सवाल उठाए हैं। कुछ स्थानों पर तस्करों द्वारा राजस्व, वन और पुलिस कर्मियों को धमकाने की घटनाओं से कानून–व्यवस्था को लेकर चिंता और बढ़ गई है, जिससे आम नागरिकों में भय का माहौल बन गया है।

वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए नागरिकों ने राज्य सरकार से मांग की है कि विशेष पथक नियुक्त कर व्यापक संयुक्त मोहीम चलाई जाए, दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए और अवैध रेती–मुरम तस्करी को पूरी तरह रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। क्षेत्र की पर्यावरणीय और आर्थिक हानि को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन ने अब भी प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो यह समस्या नियंत्रण से बाहर हो सकती है।

Next Story