कोल्हापुर में गोकुल दूध संघ के प्रशासकों द्वारा संघ की सदस्य 410 संस्थाओं की सदस्यता रद्द करने की कार्रवाई को गोकुल दूध संघ के 15 निदेशकों ने अवैध और संघ के हितों के विरुद्ध बताया है। निदेशकों ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि दूध संघ के आगामी पंचवर्षीय चुनाव में इन 410 संस्थाओं को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत मतदान का अधिकार दिलाने के लिए वे न्यायालय में उचित कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।

इस प्रेस विज्ञप्ति पर पूर्व अध्यक्ष नवीद मुश्रीफ, विश्वासराव पाटील, अरुणराव डोंगळे, अजित नरके, किसन चौगुले, रणजितसिंह पाटील, नंदकुमार ढेंगे, कर्णसिंह गायकवाड, अमरसिंह पाटील, अंबरीशसिंह घाटगे, बाळासाहेब खाडे, एस. आर. पाटील, सुजित मिणचेकर, युवराज पाटील और मुरलीधर जाधव के हस्ताक्षर हैं।

विज्ञप्ति में आगे कहा गया है कि गोकुल दूध संघ की सदस्य 410 दूध संस्थाओं की सदस्यता रद्द किए जाने के संबंध में विभागीय उपनिबंधक के आदेश के खिलाफ कुछ संस्थाओं ने मुंबई उच्च न्यायालय की कोल्हापुर सर्किट बेंच का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने न्यायालय में स्पष्ट किया था कि उसने केवल निर्देश जारी किए हैं और सदस्यता रद्द करने का कोई आदेश नहीं दिया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि 'महाराष्ट्र सहकारी संस्था नियम 1960' के कलम 25 के अनुसार सदस्यता रद्द करने का अधिकार केवल गोकुल दूध संघ के पास है।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार के इस स्पष्टीकरण से यह स्पष्ट हो गया कि गोकुल की सदस्य संस्थाओं की सदस्यता रद्द करने का अधिकार राज्य सरकार को नहीं है। इसके बाद न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार और गोकुल दूध संघ को कानून में निर्धारित प्रावधानों का पालन करते हुए यह निर्णय लेने के निर्देश दिए थे कि संबंधित संस्थाओं की सदस्यता रद्द की जानी चाहिए या नहीं। साथ ही न्यायालय ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप पूरी प्रक्रिया अपनाने का भी निर्देश दिया था। इसलिए महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम के कलम 25 के प्रावधान इस कार्रवाई पर लागू होते हैं या नहीं, इसकी पुष्टि करने के बाद गोकुल दूध संघ को संबंधित संस्थाओं को पहले नोटिस जारी करना आवश्यक था।

विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि 'महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम' के कलम 25 के अनुसार यदि कोई सदस्य मृत हो गया हो, दिवालिया घोषित हुआ हो अथवा संस्था अपने उद्देश्य पूरे नहीं कर रही हो, तभी संबंधित संस्थाओं के विरुद्ध कार्रवाई का अधिकार केवल संचालक मंडल तथा संघ के उपविधियों के अनुसार केवल वार्षिक आमसभा को है। ऐसी कानूनी स्थिति के बावजूद किसी प्रकार का अधिकार न होने पर भी प्रशासकों ने कार्यकारी संचालक के माध्यम से इन संस्थाओं के विरुद्ध कार्रवाई का प्रस्ताव अवैध रूप से पारित कराया है।

प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि इन 410 दूध संस्थाओं ने पिछले तीन वर्षों में गोकुल दूध संघ को कुल साढ़े चार करोड़ लीटर दूध की आपूर्ति की है। ऐसे में इन संस्थाओं की सदस्यता समाप्त करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है और इसे किसी भी स्थिति में उचित नहीं माना जा सकता। विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस कार्रवाई का सीधा प्रतिकूल प्रभाव गोकुल दूध संघ के दूध संग्रहण पर पड़ेगा और इसका असर अंततः दूध उत्पादक किसानों की अर्थव्यवस्था पर भी होगा। इस अन्यायपूर्ण कार्रवाई की पूरी जिम्मेदारी गोकुल दूध संघ के प्रशासकीय मंडल की होगी।

Pratahkal Bureau

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