सुप्रीम कोर्ट से गोकुळ की 492 दूध संस्थाओं को बड़ी राहत, सदस्यता रद्द करने की याचिका खारिज
गोकुळ की 492 दूध संस्थाओं की सदस्यता रद्द करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। हाईकोर्ट के निष्कर्ष कायम रहने से संस्थाओं की सदस्यता और आगामी चुनाव में मतदान का अधिकार बरकरार रहा।

कोल्हापुर जिला दूध उत्पादक संघ ‘गोकुळ’ की 492 दूध संस्थाओं की सदस्यता रद्द करने की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इन संस्थाओं की सदस्यता की कानूनी वैधता और पात्रता को लेकर मुंबई हाईकोर्ट की कोल्हापुर सर्किट बेंच द्वारा दर्ज निष्कर्षों को बरकरार रखा। इसके साथ ही 492 दूध संस्थाओं की सदस्यता कायम रहने और गोकुळ की आगामी चुनाव प्रक्रिया में उनके मतदान का रास्ता साफ हो गया है।
इस मामले में इस्पुर्ली, तहसील करवीर की श्री राम सहकारी दूध संस्था और कोगील, तहसील करवीर की श्री काडसिद्धेश्वर सहकारी दूध संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका के माध्यम से मुंबई हाईकोर्ट की कोल्हापुर सर्किट बेंच के न्यायमूर्ति शैलेश ब्रह्मे द्वारा 3 सितंबर 2026 को 492 दूध संस्थाओं की पात्रता को लेकर दिए गए फैसले को चुनौती दी गई थी।
याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पी. नरसिंहा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा दर्ज निष्कर्षों को कानूनी और उचित बताते हुए संबंधित याचिका खारिज कर दी।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद 492 दूध संस्थाओं की सदस्यता कायम रहने के साथ ही गोकुळ की आगामी चुनाव प्रक्रिया में उनके मतदान का अधिकार भी बरकरार रहा है। इससे इन संस्थाओं के चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने का रास्ता खुल गया है।
इस फैसले के बाद गोकुळ की सदस्य दूध संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पिछले छह महीने से जारी न्यायालयीन संघर्ष को विराम मिला है।
श्री विठ्ठलाई सहकारी महिला दूध संस्था, करंजफेन की अध्यक्ष और इस न्यायालयीन लड़ाई की प्रमुख याचिकाकर्ताओं में शामिल सौ. पल्लवी अनुपम वागरे ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “हम सभी दूध संस्थाओं को मतदाता सूची से बाहर करने का प्रयास किया जा रहा था। इसके लिए पिछले छह महीनों में हमें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। वकालतनामे पर हस्ताक्षर करने, प्रतिज्ञापत्र और शपथपत्र करने के लिए हमें लगातार भागदौड़ करनी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट ने हमारे खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है, जिससे इस परेशानी से हमें राहत मिली है। न्यायदेवता का आभार और सत्यमेव जयते।”
सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान 492 सहकारी दूध संस्थाओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एड. अभिषेक मनु सिंघवी, एड. पी. एस. पटवालिया, एड. आनंद लांडगे, एड. भूषण मंडलिक और एड. पृथ्वीराज पाटील ने पक्ष रखा। वहीं श्री राम सहकारी दूध संस्था, इस्पुर्ली की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एड. विकास सिंह ने दलीलें पेश कीं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से 492 दूध संस्थाओं की सदस्यता को लेकर बना न्यायालयीन पेच दूर हो गया है। इसके साथ ही संबंधित संस्थाओं के लिए गोकुळ की आगामी चुनाव प्रक्रिया में शामिल होने और मतदान करने का रास्ता खुल गया है।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
पत्रकारिता का दृष्टिकोण:
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ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।
