कोल्हापुर में गोकुळ दूध संघ की चुनाव प्रक्रिया को लेकर सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना किए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। पुंगाव (ता. राधानगरी) स्थित श्री समर्थ सहकारी दूध संस्था ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त करने की मांग की है। संस्था ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जानकारी सर्वोच्च न्यायालय के संज्ञान में लाई जाएगी। यह जानकारी संस्था ने अपने जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी है।

संस्था के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने 6 मई 2026 को गोकुळ दूध संघ का चुनाव 90 दिनों के भीतर कराने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। इसके बावजूद राज्य सहकार चुनाव प्राधिकरण के अध्यक्ष अनिल कवडे और सचिव अशोक गाडे ने आदेश की अलग व्याख्या करते हुए विधि एवं न्याय विभाग से मत मांगकर 25 दिनों की देरी की। संस्था का आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण चुनाव समय पर आगे नहीं बढ़ सका।

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि वरिष्ठ विधि विशेषज्ञ एड. सिद्धार्थ धर्माधिकारी ने तत्काल चुनाव प्रक्रिया शुरू करने की सलाह दी थी, लेकिन इसके बाद भी प्रक्रिया को गति नहीं दी गई। संस्था ने यह भी दावा किया है कि तत्कालीन उपनिबंधक राजकुमार पाटील ने न्यायालय में गलत जानकारी प्रस्तुत कर देरी होने में भूमिका निभाई।

संस्था के अनुसार, उपनिबंधक देविदास मिसाळ ने 1 जून से 1 जुलाई तक प्रस्तावों के संकलन के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद प्राधिकृत अधिकारी एवं सहायक निबंधक (दुग्ध) कृष्णा ठाकरे ने प्रस्तावों की सूची प्रस्तुत करने में अनावश्यक 22 दिनों की देरी की। संस्था का आरोप है कि इन सभी अधिकारियों ने आपसी संगनमत से 90 दिनों की निर्धारित अवधि में से 58 दिन व्यर्थ गंवा दिए और इस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के आदेशों की अवमानना की।

प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि इससे पहले उच्च न्यायालय ने भी चुनाव प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए थे। साथ ही राज्य सहकार चुनाव प्राधिकरण ने संबंधित अधिकारियों को यह चेतावनी भी दी थी कि न्यायालय की अवमानना की जिम्मेदारी तय हो सकती है। इसके बावजूद चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं होने से न्यायालय के आदेशों की अनदेखी किए जाने का दावा संस्था ने किया है।

श्री समर्थ सहकारी दूध संस्था ने मांग की है कि संबंधित सभी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त किया जाए। साथ ही चुनाव नियमों के अनुसार शेष अवधि में तत्काल चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए जाएं। संस्था ने स्पष्ट किया है कि इन मांगों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।

संस्था ने अपने बयान में कहा, “यदि न्यायालय के आदेशों का पालन ही नहीं होगा, तो यह लोकतंत्र और संविधान का उपहास होगा। ऐसे मामलों पर सर्वोच्च न्यायालय को कठोर रोक लगानी चाहिए।”

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