कर्मवीर हिरे महाविद्यालय में क्रांति दिवस उत्साह से मनाया, भुदरगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास उभरा
कर्मवीर हिरे महाविद्यालय में क्रांति दिवस पर विशेष व्याख्यान हुआ, जिसमें भुदरगढ़ तालुका के स्वतंत्रता संग्राम और स्थानीय योगदान का इतिहास सामने आया।

तस्वीर में गारगोटी स्थित महाविद्यालय के हॉल में क्रांति दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान अतिथि, प्राध्यापक और विद्यार्थी भित्तिपत्रिका के समक्ष खड़े दिखाई दे रहे हैं।
गारगोटी स्थित कर्मवीर हिरे कला, विज्ञान, वाणिज्य एवं शिक्षाशास्त्र महाविद्यालय में इतिहास विभाग की ओर से क्रांति दिवस उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर ‘भारत छोड़ो आंदोलन और भुदरगढ़ तालुका’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के साथ भुदरगढ़ तालुका के योगदान की जानकारी मिली।
कार्यक्रम की शुरुआत भारत के स्वतंत्रता संग्राम की झलक प्रस्तुत करने वाली आकर्षक एवं जानकारीपूर्ण भित्तिपत्रिका के अनावरण से हुई। इसके बाद बी.ए. बी.एड. भाग-2 की छात्राओं ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए, जिससे पूरा वातावरण देशभक्ति के रंग में रंग गया।
कार्यक्रम का प्रास्ताविक डॉ. क्रांतिसिंह देसाई ने किया। उन्होंने 9 अगस्त 1942 को शुरू हुए ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए स्वतंत्रता संग्राम में उसकी निर्णायक भूमिका पर प्रकाश डाला।
मुख्य वक्ता प्रा. (डॉ.) युवराज देवाळे ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन और भुदरगढ़ तालुका’ विषय पर अध्ययनपूर्ण व्याख्यान दिया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन की पृष्ठभूमि के साथ भुदरगढ़ तालुका के स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान, स्थानीय जनता की भागीदारी और स्वतंत्रता संग्राम की विभिन्न घटनाओं का विस्तृत अवलोकन प्रस्तुत किया। उनके व्याख्यान से विद्यार्थियों को स्थानीय इतिहास और राष्ट्रीय इतिहास के बीच संबंध को समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. यू. आर. शिंदे ने विद्यार्थियों को संवैधानिक मूल्यों, लोकतंत्र, सामाजिक समानता और राष्ट्रीय एकता के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन प्रा. सूर्यवंशी मैडम ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. राजेंद्र शिंदे ने किया।
इतिहास विभागाध्यक्ष प्रा. आहेर और डॉ. नितीन जाधव के मार्गदर्शन में कार्यक्रम की योजना बनाई गई। कार्यक्रम की सफलता के लिए डॉ. क्रांतिसिंह देसाई, प्रा. मोहिते, डॉ. मोरे, विद्यार्थियों और महाविद्यालय के सभी घटकों ने सहयोग किया। उत्कृष्ट आयोजन के लिए महाविद्यालय एवं मौनी विद्यापीठ प्रशासन ने इतिहास विभाग की सराहना की।
‘करेंगे या मरेंगे!’ के भारत छोड़ो आंदोलन के नारे के साथ कार्यक्रम का समापन प्रेरणादायी वातावरण में हुआ। इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को स्वतंत्रता संग्राम के राष्ट्रीय इतिहास के साथ भुदरगढ़ तालुका के स्थानीय योगदान से भी परिचित कराया गया।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
पत्रकारिता का दृष्टिकोण:
सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।
ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।
