सर पिराजीराव तलाव का सांडवा पुल फिर अटका, 11 करोड़ का प्रस्ताव मंजूरी के इंतजार में, बढ़ा हादसों का खतरा
मुरगूड के सर पिराजीराव तलाव सांडवा पुल के लिए 11 करोड़ का प्रस्ताव अब भी मंजूरी की प्रतीक्षा में है। पुल अटकने से हादसों का खतरा और लोगों की नाराजगी बढ़ रही है।

तस्वीर में गडहिंग्लज-कागल महामार्ग के किनारे का खुला ग्रामीण इलाका, हरा-भरा मैदान और सड़क के बगल में पानी का जमाव दिखाई दे रहा है।
गडहिंग्लज–कागल महामार्ग का काम तेजी से अंतिम चरण में पहुंच रहा है, लेकिन मुरगूड शहर के पास स्थित सर पिराजीराव तलाव के सांडवा पुल का मामला अब भी अधर में लटका हुआ है। इस महत्वपूर्ण पुल के निर्माण के लिए महाराष्ट्र पायाभूत विकास महामंडळ को 11 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिलने से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। इससे नागरिकों में एक बार फिर इस मांग की अनदेखी होने की भावना और नाराजगी बढ़ गई है।
प्रस्तावित पुल की लंबाई 120 मीटर, चौड़ाई 12 मीटर होगी और इसका निर्माण 10 पिलरों पर किया जाना है। इस पुल का आराखड़ा तैयार किया जा चुका है। देसाई इन्फ्रा कंपनी ने इस कार्य के लिए आवश्यक निधि की मांग शासन से की थी, लेकिन धनराशि मंजूर नहीं होने के कारण पुल का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो पाया है।
स्थिति यह है कि पुल के दोनों ओर गडहिंग्लज–कागल महामार्ग का काम तेजी से पूरा होने की ओर बढ़ रहा है, जबकि सांडवा पुल के लंबित रहने से पूरे परियोजना के अधूरे रहने की आशंका जताई जा रही है। इसके चलते भविष्य में यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की भी संभावना व्यक्त की जा रही है।
इस पुल के निर्माण के लिए कागल के विधायक तथा वैद्यकीय शिक्षण मंत्री हसन मुश्रीफ ने शासन स्तर पर लगातार प्रयास किए हैं। इससे पहले तत्कालीन उपमुख्यमंत्री दिवंगत अजित पवार तथा पालकमंत्री प्रकाश आबिटकर को भी मुरगूड के नागरिकों ने ज्ञापन सौंपकर पुल निर्माण की मांग की थी। वर्षों से आंदोलन, ज्ञापन और लगातार किए जा रहे प्रयासों के बावजूद यह मामला अब तक समाधान तक नहीं पहुंच सका है।
बरसात के मौसम में इस सांडवा पर लगातार तीन से चार महीने तक पानी बहता रहता है। पानी उतरने के बाद यहां बड़े पैमाने पर कीचड़ और फिसलन की परत जम जाती है, जिससे इस स्थान पर बार-बार छोटे-बड़े हादसे होते हैं। कई नागरिक गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है।
महामार्ग के अन्य हिस्सों का काम अंतिम चरण में पहुंच चुका है, लेकिन सर पिराजीराव तलाव के सांडवा पुल का निर्माण मंजूरी के अभाव में अब भी अटका हुआ है। इससे मुरगूड शहर और आसपास के क्षेत्र के लोगों में तीव्र नाराजगी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बहुप्रतीक्षित पुल को आखिर मंजूरी मिलेगी या यह परियोजना एक बार फिर लंबित रह जाएगी।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
पत्रकारिता का दृष्टिकोण:
सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।
ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।
