गडचांदूर नगरपरिषद घोटाला: कलेक्टर कार्यालय ने मुख्याधिकारी को दिए जांच और कार्रवाई के कड़े निर्देश
गडचांदूर नगरपरिषद में हुए करोड़ों के घोटाले की गूंज अब जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंच गई है। क्या फर्जी निविदाओं और गबन के आरोपी तत्कालीन मुख्याधिकारी पर होगी कानूनी कार्रवाई? जानिए इस गंभीर मामले का पूरा अपडेट।

गडचांदूर नगरपरिषद के तत्कालीन प्रशासक पर लगे आरोपों की जांच के संबंध में जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा जारी पत्र।
गडचांदूर नगरपरिषद में हुए कथित वित्तीय अनियमितताओं और बोगस निविदा घोटाले का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। नगरपरिषद के तत्कालीन प्रभारी मुख्याधिकारी और प्रशासक येमाजी धुमाळ पर घनकचरा डेपो के लिए जमीन भाड़े पर लेने के नाम पर फर्जी निविदाएं दिखाकर नगरपरिषद की निधि का गबन करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले की शिकायत भाजपा मंडल अध्यक्ष अरविंद डोहे ने की थी, जिसका संज्ञान लेते हुए अब जिलाधिकारी कार्यालय ने सख्त रुख अख्तियार किया है।
घटनाक्रम के अनुसार, अरविंद डोहे ने बीते २५ मई २०२६ को नगरपरिषद के अध्यक्ष, सभापति और पार्षदों को पत्र लिखकर इस मामले पर विशेष सभा बुलाने और आरोपी अधिकारी के खिलाफ फौजदारी कार्रवाई का प्रस्ताव पारित करने की मांग की थी। डोहे के पत्र का संदर्भ देते हुए नौ पार्षदों ने धारा ८१ के तहत विशेष सभा आयोजित करने का आग्रह भी किया था, लेकिन नगर परिषद प्रशासन द्वारा सभा न बुलाए जाने पर यह मामला और अधिक विवादास्पद हो गया। अरविंद डोहे ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी पक्ष द्वारा स्वयं भी नियम विरुद्ध पुलिया निर्माण के जरिए निधि के दुरुपयोग की योजना बनाई गई थी, जिसके कारण वे मुख्याधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सह आयुक्त डॉ. विद्या गायकवाड ने १६ जून २०२६ को गडचांदूर नगरपरिषद के मुख्याधिकारी को एक आधिकारिक पत्र जारी किया है। पत्र क्रमांक/कार्या-१०/नपप्र/टे-५/२०२६/१९२ के माध्यम से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अरविंद डोहे द्वारा लगाए गए गबन के आरोपों की बिंदुवार जांच की जाए और नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। साथ ही, जिलाधिकारी कार्यालय ने मुख्याधिकारी को इस पूरी कार्यवाही का विस्तृत अहवाल प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
अपनी मांग पर अडिग अरविंद डोहे ने जिलाधिकारी कार्यालय के इस त्वरित हस्तक्षेप पर आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि अब मुख्याधिकारी को बोगस निविदा प्रकरण और नियमबाह्य पुलिया निर्माण की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो नगरपरिषद की सभा में प्रस्ताव लाकर संबंधितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। इस आदेश के बाद अब गडचांदूर के नागरिकों की निगाहें मुख्याधिकारी की आगामी कार्यवाही और सत्ता पक्ष के रुख पर टिकी हैं, जो इस घोटाले की अगली दिशा तय करेंगे।

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