मुंबई। महानगर में नौकरी के सपनों को बेचकर ठगी करने वाले एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। सहार पुलिस ने सोलापुर निवासी 35 वर्षीय नीलेश राठोड के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, जिस पर खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) का अधिकारी बताकर 30 से अधिक उम्मीदवारों से करोड़ों रुपये ऐंठने का आरोप है।

पुलिस के अनुसार, राठोड ने नई दिल्ली स्थित आईएएस अधिकारी और कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) में उप सचिव के पद पर कार्यरत होने का झूठा परिचय दिया। उसने दावा किया कि वह केंद्रीय विभागों में भर्ती प्रक्रिया से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है और इच्छुक उम्मीदवारों को नौकरी दिला सकता है। इस भरोसे पर 30 उम्मीदवारों ने उस पर विश्वास किया और कुल मिलाकर 2.85 करोड़ रुपये का भुगतान किया।

शिकायत से खुला मामला :

मामले का खुलासा तब हुआ जब मुंबई के बाहर रहने वाले संतोष खरपुड़े ने अपनी भतीजी के लिए नौकरी दिलाने की उम्मीद में राठोड से संपर्क किया। कुछ समय बाद उन्हें एहसास हुआ कि यह पूरा खेल धोखाधड़ी का है। खरपुड़े ने सहार पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी।

पुलिस की जांच :

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी फिलहाल फरार है और उसकी तलाश जारी है। राठोड की पहचान और ठिकाने का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच और फील्ड वेरिफिकेशन दोनों स्तरों पर काम किया जा रहा है। प्राथमिक जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपी ने ‘सरकारी नौकरी’ का लालच देकर न केवल युवाओं की मेहनत की कमाई हड़पी, बल्कि उनके परिवारों की उम्मीदों को भी आघात पहुंचाया।

पुलिस का मानना है कि राठोड ने विशेष रूप से ऐसे युवाओं को निशाना बनाया, जो केंद्रीय विभागों और मंत्रालयों में स्थायी नौकरी पाने के लिए उत्सुक थे। आईएएस अधिकारी और एसएससी उप सचिव के फर्जी परिचय का जाल बुनकर उसने विश्वसनीयता का आभास कराया और कई उम्मीदवारों से लाखों रुपये वसूले।

आम जनता के लिए चेतावनी :

सहार पुलिस ने इस घटना के बाद नागरिकों को सचेत किया है कि किसी भी व्यक्ति के पद या पहचान के दावे की बिना पुष्टि किए उस पर भरोसा न करें और किसी भी स्थिति में पैसे का लेन-देन न करें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और ऑनलाइन माध्यम से संचालित होती है तथा किसी भी निजी व्यक्ति या अधिकारी को सीधे चयन का अधिकार नहीं होता।

ठगी का असर :

इस घटना ने उन परिवारों को गहरा झटका दिया है, जिनके बच्चों ने सरकारी नौकरी की उम्मीद में भारी रकम निवेश की थी। पुलिस की जांच आगे बढ़ते ही और पीड़ित सामने आने की संभावना जताई जा रही है। मुंबई जैसे महानगर में इस तरह का मामला एक गंभीर चेतावनी है कि बेरोजगारी और अवसरों की कमी का फायदा उठाकर धोखेबाज युवाओं को निशाना बना रहे हैं। सहार पुलिस की कार्रवाई से यह संदेश गया है कि ऐसे फर्जीवाड़े को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।


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