लातूर महानगरपालिका में आयुक्त के नाम पर की गई फर्जी नियुक्तियों का पर्दाफाश होते ही पूरा प्रशासन हिल गया। आयुक्त मानसी मीना के नकली हस्ताक्षर कर लिपिक पद पर नियुक्ति पत्र बांटे जाने का यह चौंकाने वाला मामला सामने आते ही मनपा में अफरा-तफरी मच गई। आयुक्त ने तुरंत कार्रवाई के आदेश देते हुए शिवाजीनगर पुलिस को मामला दर्ज करने के लिए सूचित किया और देर शाम मीडिया के माध्यम से नागरिकों को सतर्क रहने की अपील की।

घटना तब पकड़ी गई जब शुभम बालासाहेब गरड, ज्ञानेश्वरी रवी गरड, मारुति भगवान शिवणे, आदित्य भिंगे, सोमनाथ पांचाळ और बापूराव हुडे ने मनपा प्रशासन को लिखित रूप में यह पूछा कि उन्हें दिए गए लिपिक पद के नियुक्ति आदेश असली हैं या नहीं। प्रारंभिक जांच में ही स्पष्ट हो गया कि सभी नियुक्ति पत्र पूरी तरह फर्जी हैं। मनपा ने ऐसे किसी आदेश को जारी नहीं किया था और न ही इस मामले में किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता पाई गई।





जांच में पता चला कि इन नियुक्ति पत्रों पर आयुक्त मानसी मीना के नकली हस्ताक्षर किए गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयुक्त ने तुरंत विस्तृत जांच और अपराध दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही मनपा ने नागरिकों के लिए आधिकारिक चेतावनी जारी की, जिसमें कहा गया कि यदि किसी भी नियुक्ति, दस्तावेज़, या धन मांग से संबंधित संदेहास्पद गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत महानगरपालिका से संपर्क करें और किसी भी तरह की धोखाधड़ी से सतर्क रहें।

यह फर्जी नियुक्ति प्रकरण सामने आते ही शहर में चर्चा का विषय बन गया है। नागरिकों और कर्मचारियों के बीच यह सवाल प्रमुखता से उठ रहा है कि इतनी बड़ी फर्जीवाड़ा योजना किसने और कैसे संचालित की। शहर में इस साहसी बनावटगिरी प्रकरण पर कठोर कार्रवाई की मांग बढ़ती जा रही है।

Pratahkal Newsroom

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