प्रकृति में होने वाले बदलावों और पर्यावरणीय प्रक्रियाओं को वैज्ञानिक तरीके से समझने में गणित की अहम भूमिका हो सकती है। वनस्पति विज्ञान के अध्येता प्रा. सी. पी. भगत ने विद्यार्थियों से महाविद्यालय परिसर के वृक्षों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर स्थानीय कार्बन साठे की नोंद तैयार करने तथा वृक्ष प्रजातियों, वृद्धि, जैवभार और कार्बन संचयन के बीच संबंधों का अध्ययन करने का आह्वान किया।

श्री मौनी विद्यापीठ के कर्मवीर हिरे महाविद्यालय, गारगोटी में गणित विभाग की ओर से ‘पर्यावरणीय प्रतिरूपण : निसर्गातील गणिताचा शोध’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया था। इस अवसर पर प्रा. सी. पी. भगत मार्गदर्शन कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. सागर ए. व्हनाळकर ने की।

प्रा. भगत ने कहा कि पर्यावरणीय समस्याओं के अध्ययन को केवल निरीक्षण तक सीमित न रखते हुए उपलब्ध जानकारी का गणितीय विश्लेषण कर वैज्ञानिक निष्कर्ष निकालना आवश्यक है। वृक्षों की परिधि और ऊंचाई जैसे मापों के आधार पर सर्वांगानुपाती समीकरणों का उपयोग कर वृक्षों के जैवभार, कार्बन साठे तथा वातावरण से अवशोषित किए जाने वाले कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा का अनुमान लगाया जा सकता है। गणित और पर्यावरण विज्ञान के समन्वय से विद्यार्थी पर्यावरणीय समस्याओं को वैज्ञानिक और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से समझने में सक्षम होंगे।

अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. सागर ए. व्हनाळकर ने स्थानीय वृक्षों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर कार्बन साठे का मानचित्र तैयार करने की आवश्यकता व्यक्त की। उन्होंने अधिक कार्बन अवशोषित करने वाली स्थानीय वृक्ष प्रजातियों के रोपण की योजना बनाने तथा पेड़ों द्वारा अवशोषित किए गए कार्बन के वास्तविक आंकड़े लोगों के सामने रखने की बात कही। इससे जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरण को बढ़ावा देने की आवश्यकता भी उन्होंने बताई।

कार्यक्रम का प्रस्तावना भाषण गणित विभागाध्यक्ष डॉ. संताजी खोपडे ने किया। संचालन प्रा. संदीप शिंदे ने किया, जबकि आभार प्रा. अविनाश देसाई ने माना।

Vijay Morbale, Kolhapur

Vijay Morbale, Kolhapur

पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)

शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा

परिचय:

विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।

कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:

विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।

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