नागपुर। त्योहारों की रौनक पर इस बार महंगाई का साया मंडरा गया है। दिवाली से ठीक पहले महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (महावितरण) ने उपभोक्ताओं को बिजली दरों में बढ़ोतरी का झटका दिया है। कंपनी ने ईंधन समायोजन शुल्क (एफएसी) के नाम पर प्रति यूनिट 35 से 95 पैसे तक की बढ़ोतरी की घोषणा की है, जिसका असर घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक सभी वर्गों पर पड़ेगा।

1 अक्टूबर को महावितरण ने एक आधिकारिक परिपत्र जारी कर सितंबर माह की बिजली खपत पर यह शुल्क लागू करने का आदेश दिया। यह शुल्क अब उपभोक्ताओं को अक्टूबर के बिल में दिखाई देगा। कंपनी ने जुलाई में बिजली दरों में कटौती का दावा किया था, किंतु इसके तुरंत बाद अगस्त से ईंधन समायोजन शुल्क लागू कर दिया गया था। अब यह शुल्क सितंबर की खपत पर भी जोड़ा गया है, जिससे उपभोक्ताओं के बिलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जाएगी।

नई दरों के तहत 1 से 100 यूनिट तक की खपत पर 35 पैसे प्रति यूनिट, जबकि 500 यूनिट से अधिक खपत करने वाले उपभोक्ताओं को 95 पैसे प्रति यूनिट अतिरिक्त देना होगा। महावितरण ने स्पष्ट किया है कि बिजली की बढ़ती मांग और ऊँची उत्पादन लागत ने इस समायोजन को अनिवार्य बना दिया। कंपनी के अनुसार, हाल के महीनों में बिजली की खपत में अप्रत्याशित वृद्धि हुई, जिससे खुले बाजार से महँगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ी। इसके अलावा, उच्च लागत वाले बिजली उत्पादन संयंत्रों को भी सक्रिय करना पड़ा। इन सभी परिस्थितियों से उत्पन्न अतिरिक्त वित्तीय बोझ को अब उपभोक्ताओं से वसूला जाएगा।

इस दर वृद्धि का दायरा केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। वाणिज्यिक प्रतिष्ठान, छोटे व्यापारी, उद्योगपति और किसान सभी इस बढ़ोतरी से प्रभावित होंगे। इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों पर अब प्रति यूनिट 45 पैसे अधिक देने होंगे, जिससे चार्जिंग सेवाएँ भी महँगी हो जाएँगी। मेट्रो और मोनोरेल सेवाओं पर भी यही शुल्क लागू किया गया है, जिससे उनके परिचालन व्यय में इजाफा होगा। किसानों पर भी इसका असर पड़ेगा, जिन्हें अब सिंचाई हेतु उपयोग होने वाली बिजली के लिए प्रति यूनिट 40 पैसे अधिक देने होंगे।

व्यापारिक समुदाय और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए यह निर्णय विशेष रूप से बोझिल साबित हो सकता है। बीते 30 सितंबर को ही राज्य सरकार ने ‘कुसुम घटक बी’ योजना के अंतर्गत धन जुटाने के लिए औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं पर 9.90 पैसे प्रति यूनिट का अतिरिक्त कर लगाया था। अब, इसके साथ ही एलटी औद्योगिक कनेक्शनों पर 40 से 50 पैसे प्रति यूनिट और एचटी औद्योगिक कनेक्शनों पर 50 पैसे प्रति यूनिट का अतिरिक्त ईंधन समायोजन शुल्क भी जोड़ा गया है। इस दोहरी वृद्धि से उत्पादन लागत में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है, जिसका असर बाजार के मूल्य स्तर पर भी दिख सकता है।

महावितरण का कहना है कि कंपनी उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ईंधन लागत में वृद्धि ने वितरण कंपनियों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा दिया है। अधिकारियों के अनुसार, ईंधन समायोजन शुल्क को नियामकीय प्रावधानों के तहत लागू किया गया है ताकि बढ़ी हुई लागत का संतुलन बनाए रखा जा सके।

त्योहारी सीजन के बीच यह दर वृद्धि आम उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बन गई है। एक ओर लोग दिवाली की तैयारियों में जुटे हैं, वहीं बिजली बिलों में यह इजाफा घरेलू बजट को प्रभावित करेगा। छोटे दुकानदारों और कुटीर उद्योगों पर भी इसका असर पड़ना तय है, जिनकी आय पहले से ही मौसमी उतार-चढ़ाव पर निर्भर रहती है।

महावितरण का यह निर्णय ऊर्जा क्षेत्र की जटिल वास्तविकताओं को उजागर करता है,जहाँ बढ़ती मांग, सीमित उत्पादन और वैश्विक ईंधन कीमतें एक साथ मिलकर उपभोक्ताओं तक लागत का भार पहुँचा रही हैं। आने वाले महीनों में यदि ईंधन कीमतों में स्थिरता नहीं आई, तो विशेषज्ञों का अनुमान है कि बिजली दरों पर इसका प्रभाव और बढ़ सकता है।

त्योहारी रोशनी के बीच यह बढ़ोतरी निश्चित रूप से उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ने वाली है। हालांकि, महावितरण का तर्क है कि यह कदम बिजली आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखने के लिए आवश्यक है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार और नियामक संस्थाएँ इस बढ़ती लागत को संतुलित करने के लिए आगे क्या कदम उठाती हैं।


Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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