शिरपुर। खरीफ हंगाम 2026 से राज्य शासन ने ई-पीक पाहणी की पूरी जिम्मेदारी नव्याने नियुक्त किए गए ‘सहाय्यक’ (Crop Surveyor) और तलाठी के हवाले कर दी है। शासन के इस निर्णय के बाद किसानों के सामने कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। किसानों का कहना है कि पहले वे स्वयं अपने मोबाइल से ई-पीक पाहणी कर सकते थे, लेकिन अब यह विकल्प खत्म कर दिया गया है।

‘विशाल करके शेतकरी’ मंच के माध्यम से किसान विशाल करके ने इस निर्णय को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं। उनका कहना है कि पहले केवल उन 10 से 20 प्रतिशत किसानों के लिए सहायकों की मदद अपेक्षित थी, जिन्हें मोबाइल के माध्यम से ई-पीक पाहणी करना संभव नहीं था। किसानों का मानना है कि उन्हें स्वयं ई-पीक पाहणी करने का अधिकार पहले की तरह जारी रखा जाना चाहिए था।

इस नए बदलाव के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 100 प्रतिशत ई-पीक पाहणी निर्धारित समय में पूरी हो पाएगी। जब लाखों किसान स्वयं ई-पीक पाहणी करते थे, तब भी यह प्रक्रिया पूरी तरह 100 प्रतिशत पूरी नहीं हो पाती थी। ऐसे में अब पूरी जिम्मेदारी केवल कुछ सहायकों पर डालकर यह काम समय सीमा में पूरा करना कितना संभव होगा, यह सवाल उठ रहा है।

ई-पीक पाहणी के लिए शासन ने साधारण फसलों की जानकारी दर्ज करने पर प्रति प्लॉट 10 रुपये और मिश्रित फसलों के लिए 12 से 15 रुपये मानधन निर्धारित किया है। किसानों का सवाल है कि इतने कम मानधन में सहाय्यक तेज धूप और बारिश के बीच खेतों की मेड़ तक जाकर यह काम व्यावहारिक रूप से कैसे पूरा करेंगे।

ई-पीक पाहणी को लेकर 15 जुलाई और 17 जुलाई जैसी अलग-अलग तारीखें घोषित की गईं, लेकिन कई गांवों में अभी तक सहायकों द्वारा वास्तविक काम शुरू नहीं होने की बात सामने आई है। इसके साथ ही एक और समस्या यह बताई गई है कि उनके आधिकारिक एप्लिकेशन में अभी तक डेटा (Data) उपलब्ध नहीं हुआ है। ऐसे में यह प्रक्रिया वास्तव में कब शुरू होगी, इसे लेकर भी असमंजस बना हुआ है।

किसान विशाल करके ने शासन के इस नए निर्णय पर किसानों से राय मांगी है। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या ई-पीक पाहणी के लिए पहले की तरह ‘शेतकरी स्तरावरील पर्याय’ यानी किसान स्तर पर स्वयं करने का विकल्प दोबारा शुरू किया जाना चाहिए।

ई-पीक पाहणी 2026 की नई व्यवस्था में किसानों की भागीदारी, सहायकों की जिम्मेदारी और समय पर काम पूरा होने की क्षमता को लेकर उठ रहे सवाल अब प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण विषय बन गए हैं।

Pratahkal Newsroom

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