पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. गोपालराव पाटिल का निधन, लातूर पैटर्न के थे जनक
वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ और पूर्व सांसद डॉ. गोपालराव पाटिल का 86 वर्ष की आयु में निधन, लातूर को शैक्षणिक पहचान दिलाने में रही महत्वपूर्ण भूमिका।

लातूर के प्रसिद्ध बालरोग विशेषज्ञ और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. गोपालराव पाटिल, जिनका लंबी बीमारी के बाद 21 अप्रैल को अस्पताल में निधन हो गया।
लातूर के शैक्षणिक गौरव की आधारशिला रखने वाले, विश्वविख्यात 'लातूर पैटर्न' के सूत्रधार, वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. गोपालराव पाटिल का आज मंगलवार, 21 अप्रैल की सुबह दुखद निधन हो गया। उनके महाप्रयाण से लातूर सहित पूरे मराठवाड़ा क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। शिक्षा, चिकित्सा और सामाजिक क्षेत्र के एक देदीप्यमान नक्षत्र के अस्त होने से समाज में एक ऐसी रिक्ति उत्पन्न हुई है जिसे भरना असंभव है।
डॉ. पाटिल पिछले पंद्रह दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। लातूर के गैलेक्सी हॉस्पिटल में उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही "लातूर पैटर्न के आधारस्तंभ का ढहना" जैसी संवेदनाएं हर ओर से व्यक्त की जा रही हैं। शिवछत्रपती शिक्षण संस्था के अध्यक्ष के रूप में डॉ. पाटिल ने लातूर को देश के शैक्षणिक मानचित्र पर एक विशिष्ट और सम्मानित स्थान दिलाया। 'लातूर पैटर्न' केवल एक शिक्षण पद्धति मात्र नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के सफल भविष्य की संचित पूंजी साबित हुई। राजर्षि शाहू महाविद्यालय जैसी संस्थाओं के माध्यम से उनके द्वारा गढ़ी गई पीढ़ी आज विभिन्न क्षेत्रों में सफलता के झंडे गाड़ रही है।
3 अक्टूबर 1939 को धाराशिव जिले के उमरगा तहसील स्थित कवठा में जन्मे डॉ. पाटिल ने उस्मानिया विश्वविद्यालय से एमबीबीएस और डीसीएच की डिग्री प्राप्त की थी। उन्होंने 1965 में लातूर में अपनी चिकित्सा सेवा की शुरुआत की। मराठवाड़ा के एक प्रतिष्ठित बालरोग विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने हजारों बच्चों का उपचार किया। विशेष रूप से मुरुड क्षेत्र में लगातार 12 वर्षों तक निःशुल्क सेवा प्रदान कर उन्होंने जनमानस में 'देवदूत' के रूप में अपनी जगह बनाई थी।
राजनीतिक और विधायी क्षेत्र में भी उनका योगदान अविस्मरणीय रहा। डॉ. पाटिल ने 1994 से 2000 तक राज्यसभा सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने वाणिज्य, विदेश मंत्रालय और रेलवे जैसी महत्वपूर्ण संसदीय समितियों में प्रभावी भूमिका निभाई। उनकी विशिष्ट कार्यशैली और ज्ञान के कारण उन्हें 1998 में 'सर्वश्रेष्ठ डॉक्टर सांसद' के सम्मान से नवाजा गया था। बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉ. पाटिल को पढ़ने, यात्रा करने और गजल का विशेष शौक था। उनका मराठी, हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, संस्कृत और फ्रेंच जैसी अनेक भाषाओं पर असाधारण प्रभुत्व था। आजीवन सीखने की ललक और लोगों के प्रति आत्मीय व्यवहार ने उन्हें सबका प्रिय बनाए रखा।
वे अपने पीछे पत्नी शांताबाई पाटिल, एक पुत्र और तीन पुत्रियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनका अंतिम संस्कार आज शाम 5 बजे लातूर के बार्शी रोड स्थित संत तुकाराम नेशनल मॉडल स्कूल में किया जाएगा। डॉ. गोपालराव पाटिल का जाना केवल एक व्यक्ति का अंत नहीं, बल्कि एक महान युग का अंत है। लातूर पैटर्न के इस महामेरू के बिछड़ने की वेदना आने वाले लंबे समय तक महसूस की जाती रहेगी।

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