धुले जिले में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण जिले में कुल 8 हजार 145.60 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। इस बेमौसम मार से धुले और साक्री तालुका सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, जिससे हजारों किसान गहरे आर्थिक संकट में घिर गए हैं।

साक्री और धुले तालुका में सबसे ज्यादा तबाही

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ओलावृष्टि और बारिश का सबसे ज्यादा कहर साक्री तालुका में देखने को मिला है। अकेले साक्री में 9 हजार से अधिक किसान इस प्राकृतिक आपदा से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। वहीं, धुले तालुका में भी प्याज उत्पादक किसानों को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। कृषि विभाग के प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, असिंचित (जिरायत) और सिंचित (बागायती) दोनों ही क्षेत्रों में व्यापक तबाही हुई है।

फसलों और फलों के बागों के नुकसान का आंकड़ा

नुकसान के आंकड़ों पर नजर डालें तो असिंचित क्षेत्र में मक्का (1,422 हेक्टेयर) और ग्रीष्मकालीन बाजरा (186 हेक्टेयर) की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं। सिंचित क्षेत्र में सबसे बड़ा झटका प्याज की फसल को लगा है, जहाँ जिले में 4,741 हेक्टेयर प्याज की फसल ओलावृष्टि की भेंट चढ़ गई। इसके अलावा 321 हेक्टेयर में लगी सब्जियों का भी भारी नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि और तेज हवाओं के कारण पपीता और अनार के बागों को भारी क्षति पहुंची है और आम के बौर (फूल) झड़ जाने से बागवान हताश और परेशान हो गए हैं।

19 मार्च की तुलना में वर्तमान स्थिति अधिक गंभीर

गौरतलब है कि इससे पहले 19 मार्च को भी बेमौसम बारिश के कारण जिले के कुछ हिस्सों में फसलों का नुकसान हुआ था। लेकिन, 30 मार्च की ओलावृष्टि ने तबाही का दायरा कई गुना बढ़ा दिया है। 19 मार्च की तुलना में इस बार सिंचित क्षेत्रों, विशेषकर प्याज, और फलों के बागों जिनमें पपीता, केला और आम शामिल हैं, को हुआ नुकसान कहीं अधिक गंभीर है। प्रशासन के अनुसार, पिछली बार की तुलना में इस बार प्रभावित गांवों और किसानों की संख्या में भी भारी वृद्धि दर्ज की गई है। प्रभावित किसानों ने अब सरकार से "जल्द से जल्द पंचनामा कर तत्काल मुआवजे की गुहार लगाई है।"

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story