अन्न मिलावट के खिलाफ धुले में 60 छात्र बने ‘FDA ब्रांड एंबेसडर’, शुरू हुआ प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम
धुले में 60 विद्यार्थियों को ‘FDA ब्रांड एंबेसडर’ बनाया गया। घोगरे विज्ञान महाविद्यालय में अन्न मिलावट पर प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू हुआ।

तस्वीर में धुले के कॉलेज सेमिनार हॉल में अतिथि और प्राध्यापक हाथ में प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम का ब्रोशर थामे खड़े हैं, जिनके सामने मेज पर मूर्ति और पौधा रखा है।
धुले में अन्न पदार्थों की गुणवत्ता, सुरक्षा और अन्न मिलावट के प्रति समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जागरूकता पैदा करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। श्री शिवाजी विद्या प्रसारक संस्था के कै. कर्मवीर डॉ. पी. रा. घोगरे विज्ञान महाविद्यालय, धुले के जैवरसायनशास्त्र विभाग की ओर से ‘Certificate Course on Food Adulteration’ प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम का शुभारंभ मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को महाविद्यालय के सेमिनार हॉल में उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एम. वी. पाटील ने की, जबकि अन्न एवं औषधि प्रशासन विभाग के सहायक आयुक्त मा. श्री जी. वी. माहोरे प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि प्रमुख अतिथि मा. श्री जी. वी. माहोरे ने प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम में शामिल 60 विद्यार्थियों को धुले जिले में अन्न मिलावट के खिलाफ जनजागरूकता तथा एफडीए की कार्रवाई के लिए ‘ब्रांड एंबेसडर’ घोषित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने-अपने क्षेत्रों में अन्न मिलावट के संबंध में जागरूकता फैलाने, संदिग्ध मिलावट के मामलों की जानकारी संबंधित तंत्र तक पहुंचाने और नागरिकों में सुरक्षित अन्न के प्रति जागरूकता पैदा करने का आह्वान किया। विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के साथ सामाजिक जिम्मेदारी की भूमिका देने वाली यह पहल उल्लेखनीय रही।
कार्यक्रम का प्रारंभिक परिचय उपप्राचार्य प्रा. के. एम. बोरसे ने दिया। उन्होंने प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम के उद्देश्यों, विद्यार्थियों को मिलने वाले व्यावहारिक ज्ञान और अन्न मिलावट के प्रति जनजागरूकता के महत्व को स्पष्ट किया।
प्रमुख अतिथि मा. श्री जी. वी. माहोरे ने कहा कि अन्न पदार्थों में मिलावट सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से गंभीर समस्या है। अन्न की गुणवत्ता और सुरक्षा की जांच के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आधुनिक जांच पद्धतियों तथा प्रत्यक्ष प्रयोगात्मक ज्ञान को विद्यार्थियों के लिए आत्मसात करना आवश्यक है। उन्होंने विज्ञान के विद्यार्थियों से केवल प्रयोगशाला तक सीमित न रहते हुए समाज के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों में सक्रिय भागीदारी करने का भी आह्वान किया।
अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य डॉ. एम. वी. पाटील ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए कौशल आधारित और व्यावहारिक पाठ्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अन्न सुरक्षा और अन्न मिलावट के संबंध में जनजागरूकता पैदा करने के लिए विज्ञान विद्यार्थियों से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
इस प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अन्न पदार्थों में मिलावट के विभिन्न प्रकार, मिलावट की पहचान करने की वैज्ञानिक पद्धतियां, अन्न की गुणवत्ता एवं सुरक्षा तथा प्रत्यक्ष प्रयोगात्मक ज्ञान प्राप्त होगा। इससे विद्यार्थियों के शैक्षणिक ज्ञान के साथ उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण और कौशल को भी बढ़ावा मिलेगा।
इस अवसर पर जैवरसायनशास्त्र विभाग प्रमुख डॉ. युवराज अडसुळ, डॉ. आर. जी. महाले, डॉ. संभाजी पाटील, डॉ. वर्षा पाटील, डॉ. स्वप्निल जोशी, डॉ. गोपाल पाटील, डॉ. शिंपले, प्रा. सुनिता पवार, डॉ. विजय पाटील, प्रा. धनका तथा प्रा. तय्यब्बा अन्सारी उपस्थित थे। पाठ्यक्रम की समन्वयक प्रा. अश्विनी पाटील ने पाठ्यक्रम के नियोजन और आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस पहल पर संस्था की कार्यकारी समिति के सम्माननीय चेयरमैन बाबासाहेब कुणालजी पाटील, उपाध्यक्ष मा. भैय्यासाहेब डॉ. एस. टी. पाटील, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एम. वी. पाटील, कुलसचिव भाऊसाहेब श्री. नरेंद्र सुर्वे, कार्यालयीन अधीक्षक श्री. शशिकांत पाटील तथा महाविद्यालय के सभी प्राध्यापकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों ने संतोष व्यक्त करते हुए जैवरसायनशास्त्र विभाग को बधाई दी।
अन्न सुरक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक प्रतिबद्धता के समन्वय वाली यह पहल विद्यार्थियों को केवल प्रमाणपत्र प्रदान करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें समाज के स्वास्थ्य संरक्षण की जिम्मेदारी स्वीकार करने की नई दिशा देगी। धुले जिले में अन्न मिलावट के खिलाफ जनजागरूकता के लिए 60 विद्यार्थी ‘FDA ब्रांड एंबेसडर’ के रूप में कार्य करेंगे, जिससे इस पहल को विशेष महत्व मिला है।

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