धुले नगर निगम चुनाव: अनिल पाटिल का बीजेपी पर तीखा प्रहार, शिंदे सेना और एनसीपी ने फूंका चुनावी बिगुल
धुले नगर निगम चुनाव का बिगुल फूंकते हुए पूर्व मंत्री अनिल पाटिल ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। शिंदे सेना की विधायक मंजुला गावित और अनिल पाटिल ने एकवीरा देवी मंदिर में आरती कर चुनाव प्रचार शुरू किया। पाटिल ने आरोप लगाया कि लोकसभा-विधानसभा में इस्तेमाल के बाद अब उन्हें दूर किया जा रहा है, जिसका जवाब जनता मतदान से देगी। जानिए धुले की बदलती राजनीति की पूरी रिपोर्ट।

धुले: महाराष्ट्र की राजनीति में 'महायुति' के भीतर सुलग रही अंतर्कलह अब सड़कों पर आ गई है। आगामी धुले नगर निगम चुनाव की दहलीज पर खड़े शहर में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं। शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) ने भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अपने चुनावी अभियान का शंखनाद कर दिया है। शक्ति प्रदर्शन के इस दौर में पूर्व मंत्री व विधायक अनिल पाटिल और शिंदे सेना की विधायक मंजुला गावित ने आई एकवीरा देवी मंदिर में विधि-विधान से महाआरती की और चुनावी नारियल फोड़कर जीत का संकल्प लिया। श्रद्धा और राजनीति के इस संगम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि धुले की सत्ता पर काबिज होने के लिए इस बार अपनों के बीच ही कांटे की टक्कर होने वाली है।
चुनावी बिगुल फूंकते ही विधायक अनिल पाटिल ने सीधे तौर पर बीजेपी को निशाने पर लिया और जिले की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। धुले में हाल ही में हुई गोलीबारी की घटना का हवाला देते हुए पाटिल ने कड़े लहजे में कहा कि जो मंजर पूरे महाराष्ट्र ने देखा, उसने धुले जिले की छवि को बुरी तरह कलंकित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के अहंकार में डूबी बीजेपी ने जिले की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का काम किया है। अनिल पाटिल का यह हमला केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने गठबंधन धर्म में हो रही उपेक्षा को लेकर भी अपना दर्द और आक्रोश साझा किया। उन्होंने दो टूक कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के कठिन समय में शिवसेना और एनसीपी के कार्यकर्ताओं का भरपूर उपयोग किया गया, लेकिन जैसे ही नगर निगम चुनाव की बारी आई, एक सोची-समझी रणनीति के तहत उन्हें दरकिनार कर दिया गया।
यह चुनाव अब केवल सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि 'सम्मान' की लड़ाई में तब्दील होता दिख रहा है। अनिल पाटिल ने शहर में बढ़ती गुंडागर्दी और उम्मीदवारों को प्रक्रिया से बाहर रखने की कथित साजिशों पर चिंता जताते हुए कहा कि जनता सब देख रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि जिस तरह से उनके कार्यकर्ताओं के साथ 'इस्तेमाल करो और छोड़ दो' की नीति अपनाई गई है, उसका करारा जवाब धुले की जनता मतदान केंद्र पर देगी। विधायक मंजुला गावित और अनिल पाटिल के नेतृत्व में हुए इस शक्ति प्रदर्शन में भारी संख्या में कार्यकर्ताओं का जुटना इस बात का संकेत है कि इस बार मुख्य मुकाबला पूर्व मित्र दल यानी बीजेपी से ही होगा। चुनाव परिणामों के बाद नगर निगम पर शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का परचम लहराने का दावा करते हुए नेताओं ने साफ कर दिया कि धुले की राजनीति अब एक नए मोड़ पर है, जहां जनता का आक्रोश सत्ता के समीकरणों को पलटने की ताकत रखता है।

Ubaid Kadri (Dhule)
उबैद कादरी (धुले) प्रात:काल समाचार वेबसाइट के अनुभवी और समर्पित संवाददाता हैं। धुले जिले से जुड़े स्थानीय, सामाजिक और राजनीतिक समाचारों पर उनकी पैनी नज़र और निष्पक्ष रिपोर्टिंग उन्हें पाठकों के बीच भरोसेमंद बनाती है। उबैद लगातार घटनाओं की सटीक और तथ्यपूर्ण जानकारी प्रस्तुत करते हैं, जिससे पाठकों को समाचारों की वास्तविक तस्वीर समझने में आसानी होती है। उनकी पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाना और पाठकों तक महत्वपूर्ण सूचनाएँ पहुँचाना है।
