धुले शहर की सुबह आज गहरे शोक और स्तब्धता के माहौल में ढल गई। स्थानीय श्री गुरुद्वारे के प्रमुख और सर्वसमाज में अत्यंत सम्मानित बाबा धीरज सिंह खालसा ने मुंबई के कोकिलाबेन अंबानी अस्पताल में उपचार के दौरान अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही गुरुद्वारे के आसपास और पूरे शहर में दुख, आक्रोश और शांति की अपीलों का मिश्रित वातावरण बन गया।

यह घटना 1 दिसंबर की शाम को सामने आई थी, जब धुले के गुरुद्वारे के लंगर हॉल के बाहर अचानक नासिक निवासी 24 वर्षीय उमेश कैलास मालोदे ने तलवार से बाबा पर हमला कर दिया। हमले की तीव्रता इतनी भयावह थी कि बाबा के सिर और गर्दन पर गंभीर घाव लगे, जिससे उनके मस्तिष्क को गहरी क्षति पहुँची। बाबा को बचाने की कोशिश कर रहे दो सेवादार—रणविर सिंह और सुखविंदर सिंह—भी इस हमले में घायल हुए। स्थानीय उपचार में सुधार न होने के बाद 3 दिसंबर को बाबा को एयर एंबुलेंस से मुंबई भेजा गया, जहाँ कई दिनों की संघर्षपूर्ण चिकित्सा के बाद आज उनका निधन हो गया।

इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए धुले पुलिस ने तत्काल कठोर कार्रवाई की। जिला पुलिस अधीक्षक श्रीकांत धिवरे के मार्गदर्शन में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने आरोपी उमेश मालोदे को गिरफ्तार कर लिया और न्यायालय के आदेशानुसार उसे 13 दिसंबर तक पुलिस रिमांड पर रखा गया है। जांच दल आरोपी के पिछले रिकॉर्ड, मानसिक स्थिति, कॉल डिटेल्स और किसी संभावित षड्यंत्र के एंगल सहित हर पहलू को गहराई से खंगाल रहा है।

बाबा धीरज सिंह खालसा को धुले सहित आसपास के जिलों में समाजसेवा, अनुशासन और शांत स्वभाव के लिए जाना जाता था। उनके निधन ने न केवल उनके अनुयायियों को, बल्कि पूरे क्षेत्र को गहरे आघात में डाल दिया है। शहरभर में शोक व्यक्त करते हुए विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने प्रशासन से आरोपित के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

Pratahkal Newsroom

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