धुले जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर गुरुवार को एक बेहद मार्मिक और उग्र विरोध प्रदर्शन देखने को मिला, जहां सुस्त और निष्क्रिय व्यवस्था को जगाने के लिए किसानों ने पोतराज का वेश धारण कर अपने ही शरीर पर कोड़ों के प्रहार किए और सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। 'शिरपुर फर्स्ट' संगठन के नेतृत्व में हुए इस अनोखे आंदोलन में युवा किसानों ने गले में प्रतीकात्मक फांसी का फंदा डालकर तथा शरीर पर विरोध के बैनर लगाकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

इस आंदोलन का मुख्य कारण धुले जिले की प्रमुख नकदी फसल कपास को अभी तक खरीफ सीजन 2024 की फसल बीमा योजना से बाहर रखा जाना है। इसके साथ ही जनवरी में शिरपुर तहसील में हुई ओलावृष्टि के लिए स्वीकृत मुआवजा प्रशासनिक देरी और लालफीताशाही के कारण तीन महीने बीत जाने के बाद भी किसानों के बैंक खातों में नहीं पहुंच सका है।

आंदोलन के दौरान प्रतिनिधि हंसराज चौधरी ने सरकार के समक्ष किसानों की मांग रखते हुए कहा कि जटिल और अव्यावहारिक शर्तों को समाप्त कर सभी किसानों के लिए व्यापक कर्जमाफी लागू की जाए। उन्होंने कहा कि सरकार की देरी और किसानों के प्रति अन्यायपूर्ण नीतियों ने अन्नदाताओं को आत्महत्या जैसी गंभीर परिस्थितियों के मुहाने पर ला खड़ा किया है। प्रदर्शन के दौरान गले में फांसी का फंदा और शरीर पर कोड़ों के प्रहार के माध्यम से किसानों ने अपनी पीड़ा और आक्रोश को प्रतीकात्मक रूप से व्यक्त किया।

आंदोलनकारियों ने प्रशासन को स्पष्ट और कानूनी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आगामी सात दिनों के भीतर कपास को फसल बीमा योजना में शामिल कर लंबित ओलावृष्टि मुआवजा किसानों के बैंक खातों में तत्काल जमा नहीं किया गया, तो इससे भी अधिक व्यापक और उग्र आंदोलन किया जाएगा। धुले जिला कलेक्ट्रेट के बाहर हुआ यह प्रदर्शन किसानों की लंबित मांगों, प्रशासनिक उदासीनता और सरकारी नीतियों के खिलाफ बढ़ते असंतोष का बड़ा संकेत बनकर सामने आया है।

Pratahkal Bureau

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