धुले देवपुर दोहरा हत्याकांड: बाजीराव पवार समेत 11 को दोहरी उम्रकैद
जिला न्यायालय ने 2018 के रावसाहेब और वैभव पाटिल हत्याकांड में पूर्व नगराध्यक्ष सहित 11 दोषियों को सजा सुनाई, सरकारी पक्ष एक आरोपी की रिहाई के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगा।

धुले के देवपुर में 2018 में हुए रावसाहेब पाटिल और उनके पुत्र वैभव की हत्या के मामले में जिला न्यायालय द्वारा दोषियों को सजा सुनाए जाने के बाद कानूनी प्रक्रिया का दृश्य।
धुले शहर के देवपुर इलाके में साल 2018 में हुए चर्चित रावसाहेब पाटिल और उनके बेटे वैभव पाटिल के दोहरे हत्याकांड मामले में जिला न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इस मुकदमे के मुख्य सूत्रधार पूर्व नगराध्यक्ष बाजीराव पवार समेत कुल 11 लोगों को जिला न्यायाधीश जयश्री पुलाटे ने दोहरी उम्रकैद और प्रत्येक को दस हजार रुपये के जुर्माने की कड़ी सजा सुनाई है। इस मामले में आरोपियों को भागने में मदद करने वाले एक व्यक्ति को 5 साल का सश्रम कारावास दिया गया है, जबकि एक अन्य को सबूतों के अभाव में निर्दोष मुक्त कर दिया गया है। हालांकि, निर्दोष मुक्त हुए और 5 साल की सजा पाने वाले आरोपियों के फैसले के खिलाफ सरकारी पक्ष अब उच्च न्यायालय में अपील करेगा, यह महत्वपूर्ण जानकारी जिला सरकारी वकील देवेंद्रसिंह तंवर ने दी है।
हत्याकांड की पृष्ठभूमि और रंजिश का कारण
8 जून 2018 को देवपुर क्षेत्र के वानखेड़कर नगर परिसर में रावसाहेब पाटिल और उनके 21 वर्षीय बेटे वैभव पाटिल की कुकरी, तलवार और कुल्हाड़ी जैसे घातक हथियारों से वार कर अत्यंत निर्मम हत्या कर दी गई थी। जांच में यह निष्कर्ष निकला था कि 2015 के बालापुर ग्राम पंचायत चुनाव की राजनीतिक दुश्मनी और शहर के पवनपुत्र व्यायामशाला के सामने होली के डंडे को लेकर हुए विवाद के कारण पूर्व नगराध्यक्ष बाजीराव पवार ने इस हत्याकांड की साजिश रची थी। इस भीषण हमले में बाजीराव पवार, उसका बेटा गौरव पवार, जयराज पाटिल और उनके अन्य साथियों ने मिलकर पिता-पुत्र की हत्या की थी। इस मामले में देवपुर पश्चिम पुलिस स्टेशन में कुल 13 लोगों के खिलाफ हत्या और साजिश रचने का मामला दर्ज किया गया था। तत्कालीन जांच अधिकारी सरिता भांड और सतीश गोराडे ने इस अपराध की गहन जांच कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था।
न्यायालय का फैसला और सजा का विवरण
इस मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयश्री पुलाटे की अदालत में हुई। सरकार पक्ष की ओर से जिला सरकारी वकील देवेंद्रसिंह तंवर ने कुल 32 गवाहों का परीक्षण किया। रासायनिक विश्लेषण रिपोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए उन्होंने अदालत में जोरदार बहस की। तमाम पुख्ता सबूतों के आधार पर अदालत ने बाजीराव पवार, भूपेश पाटिल, हर्षल पाटिल, जयराज पाटिल, ऋषिकेश पाटिल, दर्शन परदेशी, भगवान अहीरे, अर्जुन अहीरे, गौरव पवार, भूषण कापकर और भूषण पगारे इन 11 लोगों को आईपीसी की धारा 302 और 120 (बी) के तहत दोषी करार देते हुए दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई।
अन्य आरोपियों की स्थिति और कानूनी कार्यवाही
आरोपियों को भागने में मदद करने के मामले में संदीप उर्फ विक्की वेलीस को 5 साल का सश्रम कारावास सुनाया गया, जबकि वैभव उर्फ सोनू पवार को निर्दोष मुक्त कर दिया गया। मूल शिकायतकर्ता की ओर से एडवोकेट नीलेश दुसाने ने पैरवी की। एक ही अपराध में 11 लोगों को दोहरी उम्रकैद मिलना एक दुर्लभ घटना है और इस फैसले से पूरे जिले में बड़ी खलबली मच गई है।

Pratahkal Bureau
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